कहते हैं ना राह चाहे कितनी मुश्किल हो, हार नहीं माननी चाहिए। मंजिल देर सवेर आपको मिल ही जाती है। ये उदाहरण सच साबित होता है चंपावत की दीपा खर्कवाल के बारे में। दीपा ने महज तीन सौ रुपये से शुरू किए बिजनेस को अपनी कड़ी मेहनत के बाद बड़े मुकाम तक पहुंचाया है।
1999 में एक हादसे ने दीपा की जिंदगी बदल दी। पति कैलाश ने बीमारी के चलते बिस्तर पकड़ लिया। अब पूरे परिवार की जिम्मेदारी दीपा के कंधों पर आ गई। लेकिन, किस्मत को आंख दिखाते हुए दीपा ने गारमेंट्स का बिजनेस शुरू किया। इसके बाद दीपा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।