स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सहयोगी बैंकों ने एसबीआई प्रबंधन के खिलाफ आंदोलन शुरू दिया है। इस कड़ी में शुक्रवार को एसबीआई व इंडियन ओवरसीज बैंक को छोड़कर सभी राष्ट्रीयकृत सरकारी बैंकों में हड़ताल पर हैं। इससे न कोई लेन देन होगा और न ही चेक क्लियरेंस होगी।
बृहस्पतिवार को उत्तरांचल बैंक इंप्लाइज यूनियन के तहत स्टेट बैंक प्रबंधन व केंद्रीय वित्त मंत्री के खिलाफ एकजुट होकर एसबीआई के सहयोगी बैंक कर्मचारियों ने स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर कार्यालय के सामने जमकर नारेबाजी व प्रदर्शन किया। इस कड़ी में शुक्रवार को एसबीआई को छोड़कर इसके सभी सहयोगी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक से लेकर तमाम सरकारी राष्ट्रीयकृत बैंक और नैनीताल बैंक, फेडरल बैंक, कर्नाटका बैंकों के कर्मचारी पूर्ण हड़ताल पर रहेंगे। इंडियन ओवरसीज बैंकों में यह हड़ताल नहीं होगी।
एसबीआई पर लगाए ये आरोप
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि एसबीआई अपने पांच सहयोगी बैंकों को श्रम नियमों का अनदेखा कर काम के घंटे बढ़ाने, सात दिन बैंकिंग काम कराने, कार्यभार बढ़ाने और अधिकारियों को जिम्मेदारी देने की कोशिश में है।
इसके अलावा एसबीआई की पॉलिसी से हर तीन साल में ग्रामीण या शहरी क्षेत्रों में ट्रांसफर, एसडब्ल्यूओ की जूनियर असिस्टेंट बनाकर मार्केटिंग में भेजने का काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उन्हें सीपीसी के बारे में सहमति न मिलने पर अब कर्मचारियों को बढ़े आवास ऋणों और अन्य सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है।
एसबीआई व कोआपरेटिव हड़ताल में शामिल नहीं
इसके विरोध में शुक्रवार को उत्तराखंड के सभी सरकारी बैंक (एसबीआई व कॉपरेटिव बैंक को छोड़कर) कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इसके अलावा नैनीताल बैंक, फेडरल बैंक, कर्नाटका बैंक आदि निजी बैंक के कर्मचारी भी हड़ताल पर रहेंगे। प्रदर्शन करने वालों में महामंत्री जगमोहन मेंदीरत्ता, आरके गैरोला, सोहन सिंह रजवाड़, राजन पुंडीर, मुरारी लाल नौटियाल, विनय कुमार शर्मा, राजेश सिंघल, सबलोक, इंद्र सिंह, डीएन उनियाल आदि मौजूद रहे।