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आदर्श गांव वालों को बैंकिंग के लिए 20 किमी दूर जाने की मजबूरी

Sun, 02 Jul 2017 03:59 PM IST
गणेश उपाध्याय / अमर उजाला, बागेश्वर
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supi gaon - फोटो : amar ujala
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उत्तराखंड में विकास खंड कपकोट के सुदूरवर्ती सूपी ग्राम पंचायत को सांसद आदर्श गांव बने नवंबर में तीन साल पूरे हो जाएंगे।
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केंद्रीय कपड़ा राज्य मंत्री एवं सांसद अजय टम्टा की ओर से गोद लिए गए गांव ने इस समयावधि में कुछ तो हासिल कर लिया है, पर अभी बहुत कुछ हासिल करना बाकी है। देश के विभिन्न हिस्सों में जहां जनधन योजना का डंका बज रहा है, लेकिन इस गांव में आज तक किसी राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा नहीं खुल सकी है। बैंकिंग संबंधी कामकाज के लिए लोगों को 20 किमी दूर कपकोट जाना पड़ता है।
  
सांसद टम्टा द्वारा सूपी गांव को गोद लेने के बाद भी सांसद निधि से गांव में गिने-चुने काम ही कराए गए हैं। पीएमजीएसवाई के तहत गांव को सड़क से जोड़ा तो गया है, लेकिन उसका डामरीकरण नहीं हो सका है। राइंका में प्रधानाचार्य समेत कई शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। गांव के लिए स्वीकृत चार आंगनबाड़ी केंद्र के भवनों का निर्माण भी आज तक नहीं हो सका है।
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पर्यटकों की सुविधा के लिए सवा करोड़ की लागत से पांच हट्स मंजूर हुए थे, वे अधूरे हैं। गांव में किसी राष्ट्रीयकृत बैंक की शाखा नहीं खुलने से ग्रामीण खफा भी हैं। उनका कहना है कि यदि इस समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

सूपी गांव के चरण सिंह टाकुली का कहना है कि विकास और रोजगार खड़ा करने में बैंक का बड़ा रोल होता है, फिर भी गांव में आज तक बैंक की शाखा स्थापित नहीं की गई है। आदर्श गांव का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब ग्रामीणों को बैंक के काम के लिए 20 किमी की दौड़भाग से मुक्ति मिलेगी।  
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सूपी गांव की कुछ खास बातों पर एक नजर 
- 2011 की जनगणना के अनुसार सूपी ग्राम पंचायत की आबादी 2200 है। यहां 1192 मतदाता हैं।
- इस गांव को 14 नवंबर 2014 में सांसद आदर्श गांव का ओहदा मिला 
- गांव की कई पगडंडियों की हालत भी खस्ता है।  
- गांव में रोजगार के लिए कोई साधन नहीं है।  

सूपी गांव में इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना मुख्य उद्देश्य है। गांव को सड़क से जोड़ दिया गया है। डामरीकरण के लिए डेढ़ करोड़ रुपये मंजूर करा दिए हैं। ग्रामीणों को जड़ी-बूटी और दुग्ध उत्पादन से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। योजना के अनुसार ग्रामीणों को स्वावलंबी बनाना है। गांव की अन्य लंबित समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। 
- अजय टम्टा, सांसद, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़
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