उन्होंने कहा कि मालिकों को लाभ पहुंचाने के लिए सरकार श्रमिक नियमों में बदलाव कर रही है। देश की आर्थिक नीतियां पूंजीपतियों के हितों के लिए बनाई जा रही हैं। बैंकों का विस्तार करने के बजाय मर्जर हो रहा है। इस कारण कई कर्मचारियों को स्वेच्छक सेवानिवृत्ति लेने को मजबूर होना पड़ा।
बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक के विलय से दोबारा ऐसे हालात पैदा होंगे। बड़ी संख्या में बैंकों की शाखाएं बंद हो जाएंगी। सरकार निजी बैंकों को बढ़ावा दे रही है और सरकारी बैंकों की निजीकरण का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने सभी श्रमिकों को बोनस व न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये देने की मांग की। साथ ही आउटसोर्स कर्मियों को नियमित किया जाए।