जौनसार बावर क्षेत्र में दलितों के मंदिर प्रवेश पर रोक का मामला राज्य मानवाधिकार आयोग में पहुंच गया है। आयोग ने इसे मानवाधिकार का घोर उल्लंघन मानते हुए देहरादून के जिलाधिकारी से जवाब मांगा है।
रसूलपुर (विकासनगर) निवासी दौलत कुंवर ने इस संबंध में आयोग में शिकायत की थी। आयोग में सुनवाई के दौरान दौलत ने बताया कि पिछले 400 साल से जनजाति क्षेत्र जौनसार बावर में दलितों और महिलाओं को मंदिर में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है। इसके लिए क्षेत्र के दलित समाज के लोगों ने कई संघर्ष किए, लेकिन आजादी के 68 वर्ष बाद भी स्थिति जस की तस है।
आयोग से लगाई गुहार
शिकायतकर्ता ने दलित समाज द्वारा किए जा रहे संघर्षों के बारे में प्रकाशित खबरों से संबंधित अखबारों की कतरन भी आयोग के समक्ष रखीं। आयोग से गुहार लगाई कि जौनसार बावर क्षेत्र में दलितों और महिलाओं को शांतिपूर्ण तरीके से मंदिरों में आने जाने की व्यवस्था के लिए प्रशासन को निर्देशित करें।
आयोग ने दलितों और महिलाओं के मंदिर प्रवेश पर पाबंदी को मानवाधिकारों का घोर उल्लघंन माना है। मामले की सुनवाई कर रहे आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति राजेश टंडन ने कहा कि भारतीय संविधान के अंतर्गत यह नियंत्रण असंवैधानिक है।
न्यायमूर्ति टंडन ने जिलाधिकारी देहरादून को दो महीने के भीतर इस संबंध में आयोग के समक्ष जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। आयोग में मामले की अगली सुनवाई की तिथि तीन मार्च तय की गई है।