फर्जी कागजातों के आधार पर पासपोर्ट हासिल करने के मामले में योगगुरु बाबा रामदेव के दाहिने हाथ माने जाने वाले पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
शनिवार को इस मामले में आचार्य बालकृष्ण और संस्कृत महाविद्यालय खुर्जा के प्राचार्य नरेश चंद्र द्विवेदी पेश हुए। सुनवाई के दौरान देहरादून में सीबीआई की विशेष अदालत ने पेश साक्ष्यों के आधार पर कहा कि प्रथमदृष्ट्या इस मामले में आचार्य और द्विवेदी के खिलाफ मुकदमा चलाए जाने के पर्याप्त सुबूत हैं।
सीबीआई की विशेष न्यायाधीश प्रीतू शर्मा की अदालत ने मामले की पत्रावली 13 सितंबर को तलब की है। इस तिथि को आचार्य के खिलाफ अभियोग तय किए जाएंगे। इसे न सिर्फ बालकृष्ण बल्कि रामदेव के लिए भी बड़ा झटका माना जा सकता है।
आचार्य बालकृष्ण खिलाफ धाराएं
अदालत ने मामले में पेश किए गए दस्तावेजों को देखते हुए आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र), फर्जीवाड़ा (धारा 420), धारा 468 (धोखा-धड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) धारा 471 (कूटरचना कर प्रमाण पत्र के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करना) एवं पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12 के तहत अपराध का मामला चलाए जाने का प्रथमदृष्ट्या पर्याप्त सबूत है।
नरेश चंद द्विवेदी के खिलाफ धाराएं
आचार्य बालकृष्ण को डिग्री दिलवाने के आरोप में संस्कृत महाविद्यालय खुर्जा के प्राचार्य नरेश चंद्र द्विवेदी के खिलाफ भी धारा 120 बी, धारा 420 और धारा 468 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। कोर्ट ने माना कि इनके खिलाफ भी प्रथमदृष्ट्या पर्याप्त सबूत हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस तिवारी के मुताबिक आचार्य बालकृष्ण के खिलाफ यदि इन धाराओं में आरोप साबित होते हैं तो उन्हें सात साल से लेकर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। 120 बी में सात साल से आजीवन कारावास एवं अन्य धाराओं में सात साल तक की सजा का प्रावधान है।