बाल अधिकार संरक्षण आयोग के तेवर सख्त करते ही पुलिस मुख्यालय ने आयोग की ओर से मांगी गई पूरी जानकारी उपलब्ध करा दी।
आयोग ने राज्य स्थापना से लेकर अब तक 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की सड़क हादसों में हुई मृत्यु के आंकड़ों की जिलेवार रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय से मांगी थी। पिछले एक साल से आयोग यह आंकड़े मांग रहा था। आयोग ने इस दौरान तीन रिमाइंडर भी भेजे पर पुलिस मुख्यालय से कोई जवाब नहीं मिला। ऐसे में आयोग ने सख्त रवैया अपनाते हुए 24 फरवरी को डीजीपी को आयोग के समक्ष पेश होने के लिए कहा था।
आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूरी ने बताया कि करीब एक साल पहले आयोग ने पुलिस मुख्यालय से हादसों में जान गंवाने वाले बच्चों के जिलेवार आंकड़े मांगे थे। इस दौरान आयोग ने तीन रिमाइंडर भी भेजे। आयोग को मुख्यालय स्तर से इस मामले में सूचना तो दूर, यह तक सूचित नहीं किया गया कि आपके कार्यालय से इस संबंध में कार्रवाई के लिए अधीनस्थ पदाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि नहीं।
उन्होंने बताया कि पुलिस मुख्यालय स्तर से लगातार इस मामले को लेकर सुस्ती बरती गई। जब आयोग ने 24 फरवरी को डीजीपी को तलब किया तो 22 फरवरी को ही सारी जानकारी पुलिस मुख्यालय ने आयोग को भेज दी। उन्होंने बताया कि जब जानकारी मिल गई है तो डीजीपी को तलब करने की जरूरत ही नहीं रह जाती है।