यूं तो सभी मास पवित्र हैं, लेकिन भारतीय प्रज्ञा में बैशाख और कार्तिक को भारी महत्व दिया गया है। बैशाख और कार्तिक दोनों को ही यह श्रेय प्राप्त है कि वे सीधे भगवान विष्णु से जुड़े हैं, जो इस ब्रह्मांड के जन्मदाता हैं। संयोग देखिए कि देश के अनेक महापुरुषों ने बैशाख में ही जन्म लिया। इसी महीने अवतरण भी हुए।
भारतीय सांस्कृतिक में महापुरुषों को बड़ा मान दिया गया है। उनकी जयंती पर मेले भरते हैं, व्रत रखे जाते हैं और अनेक प्रकार के साधनाएं की जाती है। प्रत्येक मास के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष का महत्व अलग है। कृष्ण पक्ष जहां पितरों के नाम होता है, वहीं शुक्ल पक्ष में देश निमित्त कर्मकांड संपन्न होते हैं। हाल में संपन्न बैशाख के कृष्ण पक्ष में सति अनुसूया और बल्लभाचार्य के जन्म हुए। मां वरुथिनी भी इसी पक्ष में अवतरित हुई। शुक्ल पक्ष में 17 अप्रैल को शिवाजी का जन्म हुआ था।
18 अप्रैल को भगवान पशुराम इस धरती पर अवतरित हुए। संयोग यह है कि इस वर्ष इसी दिन शनि भी वक्री हो रहे हैं। 20 अप्रैल को आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य की जयंती है। 21 अप्रैल को महान संत रामानुजाचार्य प्रगट हुए थे। 22 अप्रैल को मां गंगा का अवतरण हुआ। वहां से बहती हुए गंगा दशहरे के दिन मैदान में उतरी। 23 अप्रैल को भगवती बगुला मुखी की जयंती है। 24 अप्रैल को मां सीता ने इस धरती के गर्भ से जन्म लिया था। 26 अप्रैल को समुद्र मंथन के दौरान भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर अमृत लूटने आए राक्षसों को छला और देवों को अमृत दे दिया।
इसी प्रकार 28 अप्रैल को भगवान नृसिंह का अवतार इस धरती पर हुआ। नृसिंह जयंती दक्षिण भारत के साथ-साथ पाकिस्तान के हिंदुओं द्वारा भी मनाई जाती है। बैशाख शुक्ल चतुर्दशी यानी कि 29 अप्रैैल को भगवान विष्णु ने कुर्मावतार लिया था। इस तिथि को भगवान विष्णु ने सत्य नारायण रूप धारण किया।
बैशाख शुक्ल पक्ष के अंतिम दिन भगवान बुद्ध का अवतार हुआ। यह दिन भारत में ही नहीं दक्षिण एशिया के अनेक देशों में बुद्ध जयंती के रूप में मनाया जाता है। सिद्ध होता है कि अनेक महापुरुषों और अवतारों ने अपने आगमन के लिए बैशाख मास का चयन किया। यहीं वजह है कि इस मास को पूरे भारत में स्नानों और दानपुण्य के मास के रूप में मनाया जाता है।