मैदानी सीटों पर हाथी (बसपा) की चाल तय करेगी कि प्रदेश में कमल खिलेगा या सत्ता पर कांग्रेस का पंजा अपनी छाप छोड़ेगा। शुरुआती झटकों के बाद बसपा ने प्रचार के अंतिम चरण में हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर की 20 मैदानी सीटों पर जातीय समीकरण साधना शुरू कर दिया है।
दल-बदल, प्रत्याशी चयन विवाद और रूठने मनाने के सिलसिले से बैकफुट पर आई बसपा को पार्टी सुप्रीमो मायावती की ऊधमसिंह नगर में हुई रैली के बाद संजीवनी मिलती दिख रही है। वर्ष 2012 में बसपा का दोनों मैदानी जनपदों में 25 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर रहा है। पीएम मोदी की हरिद्वार रैली से एक दिन पहले नौ फरवरी को माया लक्सर में क्या करिश्मा दिखाती हैं, उससे दोनों विरोधी दलों की हरिद्वार की सियासी रणनीति तय होगी।
वर्ष 2012 के चुनावी नतीजों के अनुसार हरिद्वार बसपा का मजबूत गढ़ है। हरिद्वार में तो तीन सीटें भगवानपुर, झबरेड़ा और मंगलौर में पार्टी जीती, जबकि ज्वालापुर, पिरान कलियर, खानपुर और लक्सर में नंबर दो और चार सीटों पर पार्टी तीसरे स्थान पर खिसकी। ऊधमसिंह नगर में बसपा पुराना रिकॉर्ड तो नहीं दोहरा पाई, लेकिन नौ सीटों से सात पर टॉप थ्री में रही। पिछले चुनाव में बसपा की हरिद्वार में मजबूती से कांग्रेस को अधिक नुकसान हुआ।
हरिद्वार में भाजपा पांच तो ऊधमसिंह नगर में सात सीटों पर जीती। बसपा का कैडर वोट माना जाने वाला दलित वोट बैंक भाजपा और कांग्रेस की जीत हार में अहम साबित होता रहा है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा दोनों जनपदों में बसपा के समीकरणों में बड़ा उलटफेर कर चुकी है। बसपा जिन सीटों पर जीती या पहले तीन स्थानों में रही वहां पार्टी प्रत्याशी बुरी तरह पिछड़े।
कई नए चेहरों को मौका
मायावती
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बसपा विधायक सुरेंद्र राकेश की मौत के बाद पत्नी ममता ने कांग्रेस का हाथ थाम लिया। चुनाव से ठीक पहले झबरेड़ा विधायक हरिदास ने बसपा से टिकट कटने पर कांग्रेस ज्वाइन कर ली। आसन्न विधानसभा में बसपा के खाते में केवल एक विधायक सरबत करीम अंसारी बचे हैं, जिन्हें पार्टी ने फिर से मंगलौर से उतार दिया है। पूर्व विधायक शहजाद ने पार्टी छोड़ पिरान कलियर से निर्दलीय ताल ठोकी है।
पार्टी ने अपने वोट बैंक पर भरोसा दिखाते हुए कई नए चेहरों को मौका दिया है, जिससे प्रचार के शुरुआती चरण में उन्हें कमजोर आंका गया। लेकिन अब प्रचार तेज होने के साथ बसपा अपने वोट बैंक संजोए रखने के साथ अल्पसंख्यक कार्ड भी खेल रही है। मायावती ने यूपी में जिस तरह अल्पसंख्यक वोट बैंक को अपने पक्ष में करने के लिए लगभग सौ मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है, उसका फायदा पार्टी उत्तराखंड के मैदानी जनपदों में भी लेने की कोशिश करेगी। मायावती की बृहस्पतिवार को लक्सर में होने वाली रैली तय करेगी कि पार्टी कौन सा कार्ड खेलती है।
वोट बैंक का गणित
2012 में ऊधमसिंह नगर की नौ सीटों में बसपा एक सीट पर नंबर दो और एक पर नंबर चार पर रही। शेष सभी सीटों पर पार्टी नंबर तीन पर रही। पार्टी का वोट शेयर जनपद में 21 प्रतिशत रहा। हरिद्वार की 11 सीटों पर वर्ष 2012 में बसपा का 29 प्रतिशत वोट शेयर रहा है। जबकि राज्य में पार्टी का कुल वोट प्रतिशत 12.28 रहा है। इसमें दलित और अल्पसंख्यक का हिस्सा सर्वाधिक माना जाता है, जो एक तरह से कांग्रेस का भी वोट बैंक रहा है। हालांकि वर्ष 2014 लोकसभा चुनाव में यह समीकरण विफल रहे थे। अब भाजपा के लिए मोदी मंत्र से उन्हीं समीकरणों के करीब पहुंचना है, जबकि कांग्रेस के लिए अल्पसंख्यक और दलित कांबिनेशन अपने पक्ष में लाने की बड़ी चुनौती है।