हाईकोर्ट ने बदरीनाथ-केदारनाथ हेली सेवा के लिए टेंडर प्रक्रिया पर रोक जारी रखते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए आठ मई की तिथि नियत की है। न्यायमूर्ति आलोक सिंह की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
देहरादून के आरडी ग्रुप ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि सरकार ने 2015 की आपदा के बाद बदरीनाथ, केदारनाथ में यातायात व्यवस्था सुचारु बनाने के लिए 14 हेली कंपनियों को हेलीपैड बनाने की अनुमति दी थी।
14 हेलीपैड बनाए गए। चार हेलीपैड सरकार ने भी बनाए। सरकार ने 2016 में एक शासनादेश जारी किया था जिसमें कहा था कि सुरक्षा की दृष्टि से मंदाकिनी घाटी में एक बार में छह से अधिक हेलीकाप्टर उड़ान नहीं भर सकते।
भविष्य में भी कोई नया हेलीपैड बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यहां 18 हेलीपैड पहले से ही बने हुए हैं, लेकिन इन 14 कंपनियों के अलावा चार अन्य हेली कंपनियों ने मंदाकिनी वैली में चार नए हेलीपैड बना दिए।
इसकी शिकायत डीएम ने सरकार से की लेकिन सरकार ने इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। पांच फरवरी 2019 को सरकार ने बदरीनाथ, केदारनाथ में हेली सेवा के लिए इन 14 हेली कंपनियों से टेंडर प्रक्रिया आमंत्रित की, लेकिन सचिव उड्डयन ने इस निविदा को 16 फरवरी 2019 को संशोधित कर उन चार कंपनियों को भी बैकडोर से शामिल कर दिया, जिन्होंने आदेश के बाद वहां अवैध रूप से हेलीपैड बना दिए थे। इस टेंडर प्रक्रिया को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए आठ मई की तिथि नियत की।