ऋषिकेश-बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर सकनीधार के समीप बोल्डर और मलबा आने से करीब नौ घंटे यातायात ठप रहा। बोल्डर तोड़ने के लिए लोनिवि एनएच खंड को मशीन लगानी पड़ी। काफी मशक्कत के बाद सुबह करीब 10 बजे मार्ग को यातायात के लिए खोला गया। हालांकि पुलिस ने मार्ग अवरुद्ध होने की सूचना मिलने पर यातायात को अन्य मार्गों पर डायवर्ट कर दिया था।
शनिवार रात करीब साढ़े 12 बजे तोताघाटी और सकनीधार के मध्य भारीभरकम चट्टान टूटकर सड़क पर आ गिरी। इससे करीब 50 मीटर हिस्से में भारी बोल्डर व मलबा फैल गया, जिससे यहां पैदल जाने लायक भी जगह नहीं बची। मार्ग खोलने के लिए लोनिवि राष्ट्रीय राजमार्ग खंड श्रीनगर ने तड़के ही दोनों ओर मशीन लगा दी। बड़े पत्थरों को हटाने में असफल होने पर पत्थर तोड़ने वाली मशीन बुलाई गई, जिसके बाद सुबह 10 बजे बाद मार्ग से मलबा हटाया जा सका।
हाईवे बंद होने के कारण तड़के चलने वाले सब्जी, अखबार, दूध, ब्रेड जैसे रोजमर्रा की वस्तुएं लेकर चलने वाले वाहन अपने गंतव्य तक समय तक नहीं पहुंच पाए। ऋषिकेश, श्रीनगर व पौड़ी से सुबह चलने वाली नियमित बस सेवा भी इससे प्रभावित हुई।
थाना प्रभारी विनोद राणा ने बताया कि रात को राजमार्ग बंद होने की सूचना पर वाहनों को रोकने के लिए कहा गया था। साथ ही ऋषिकेश जाने वाले वाहन गजा-चंबा के रास्ते भेजे गए। इधर, लोनिवि के अधिशासी अभियंता मनोज बिष्ट के अनुसार जहां बोल्डर गिरे थे वहां काम नहीं चल रहा है, लेकिन मार्ग बंद होने पर तत्काल काम शुरू करा दिया गया।
अगर, मौसम ने साथ दिया तो केदारनाथ में जमी बर्फ एक माह में पिघल सकेगी। ऐसा न हुआ तो अगामी यात्रा तैयारियों में प्रशासन, विभाग और कार्यदायी संस्थाओं को खासी मुश्किलें हो सकती हैं।
धाम में साढ़े नौ फीट बर्फ मौजूद है। रविवार को यहां दिनभर मौसम सुहावना रहा और धूप खिली रही। इस दौरान अधिकतम तापमान 13 डिग्री और न्यूनतम माइनस 9.9 डिग्री सेल्सियश दर्ज किया गया।
बीते 21 जनवरी के बाद से 15 फरवरी की रात तक केदारनाथ में 6 बार तेज बर्फबारी हो चुकी है। वर्तमान में यहां मंदिर परिसर से लेकर पूरे क्षेत्र में साढ़े नौ से 11 फीट तक बर्फ जमा है। केदारनाथ से गौरीकुंड के बीच भी पैदल मार्ग पर रामबाड़ा तक 5 से 7 फीट बर्फ है, जिस पर आवाजाही करना भी मुश्किल है। पूरे मार्ग पर ग्लेशियर जोन सक्रिय है। लिनचोली से रुद्रा प्वाइंट तक 6 स्थानों पर 50 फीट से अधिक लंबाई और 30 फीट से अधिक चौड़ाई के ग्लेशियर पसरे हुए हैं।
केदारनाथ में मौजूद कार्यदायी संस्था वुड स्टोन के टीम प्रभारी कैप्टन सोबन सिंह बिष्ट ने बताया कि जिस तरह के हालात अभी हैं, उनसे पार पाना आसान नहीं है। सभी कार्य स्थल बर्फ से ढके हुए हैं।
अगर, मौसम साफ रहा तो एक माह में बर्फ पिघल सकती है। साथ ही मजदूरों की संख्या बढ़ाकर बर्फ को साफ करने में 25 दिन से अधिक लग सकते हैं। उन्होंने बताया कि बीते 28 दिन से धाम में बाहरी पुनर्निर्माण कार्य ठप है। जबकि बिजली के अभाव में तीर्थ पुरोहितों के आवासीय भवनों के अंदर फिनिशिंग का कार्य प्रभावित हो रहा है।