बद्रीनाथ केदारनाथ समिति बहाल करने के उच्च न्यायालय की एकलपीठ के आदेश को अब सरकार ने फिर से उच्च न्यायालय की खंडपीठ में चुनौती दी है। अपील पर सुनवाई अब चार जनवरी को होगी।
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। सरकार ने उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष स्पेशल अपील दायर कर एकलपीठ के आदेश को चुनौती दी थी। एकलपीठ ने बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति को बहाल करने के आदेश देते हुए समिति भंग करने के सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया था।
पूर्व में देहरादून निवासी दिवाकर चमोली और दिनकर बाबुलकर ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर कहा था कि धर्मस्व सचिव शैलेश बगौली की ओर से एक अप्रैल को समिति को भंग कर दिया गया था। इस पर कोर्ट ने 30 मई को आदेश पारित कर समिति को बहाल करने के आदेश दिए थे। आठ जून को सचिव धर्मस्व ने समिति को दोबारा भंग कर दिया।
इसके बाद एकलपीठ ने याचिका को निस्तारित करते हुए सरकार के आदेश को निरस्त करते हुए समिति को बहाल कर दिया था। एकल पीठ के इस आदेश के खिलाफ सरकार ने न्यायालय में स्पेशल अपील दायर की। सरकार ने पैरवी के लिए सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता कार्तिकेय को नियुक्त किया था।