करीब एक पखवाड़ा पहले कोटद्वार निवासी कुसुम काला की आंखों में आंसू थे। महंत इंद्रेश अस्पताल में बिस्तर पर पड़े गुर्दा रोग पीड़ित शिक्षक पति की ओर इशारा करते हुए उन्होंने शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठाया था। कहा था, ‘हमारी कोई सिफारिश नहीं, इसलिए सुनवाई भी नहीं हो रही।’
शनिवार को फिर उनकी आंखों से आंसू झरने लगे, लेकिन इन आंसुओं में दर्द नहीं, खुशी का अहसास छिपा था। खुशी ये कि 17 साल बाद उनके पति का दुर्गम स्कूल में तैनाती का वनवास खत्म हो गया था।
उससे भी अधिक ये कि अब उनके पति को इलाज के लिए पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लाक के राजकीय इंटर कालेज जसपुर से दून तक 329 किलोमीटर की दौड़ नहीं लगानी होगी। 16 मार्च को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद नींद से जागे शिक्षा विभाग ने कमलेश्वर प्रसाद काला को हाईस्कूल डोईवाला (देहरादून) से संबद्ध कर दिया है।
अमर उजाला संवाददाता के जरिये यह जानकारी ज्यों ही कुसुम को मिली वह बोलीं, ‘धन्यवाद भैया। अमर उजाला ने मेरे पति की समस्या न उठाई होती तो जाने क्या होता।’