देहरादून स्थित श्रीमहंत इंदिरेश अस्पताल के डॉक्टरों ने एक मासूम को नया जीवन दिया। बिना खाने के नली के पैदा हुई 11 महीने की सानिया को अस्पताल डॉक्टरों ने दूध की घूंट पिलाई।
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डॉक्टरों ने सर्जरी करके बच्ची के खाने की नली बना दी। जब बच्ची ने दूध पिया तो डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की खुशी का ठिकाना न रहा। सानिया जन्म से ही इसोफेज़ियल अटरेजिया नामक बीमारी से पीड़ित थी। इस मर्ज में आहार नाल जन्मजात नहीं होती।
केस था जटिल
डॉ. मधुकर मलेठा ने बताया कि सानिया का केस जटिल था। ऑपरेशन के प्रथम चरण में पेट में एक ट्यूब डाल दी गई थी जिससे अब तक बच्ची की फीडिंग हो रही थी। दूसरे चरण में पेट के एक हिस्से को लेकर नई आहार नाल बनाई गई इसे मेडिकल भाषा में रिवर्स गैस्ट्रिक ट्यूब ऐसोफैगो प्लास्टी कहते हैं।
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वैसे इसोफेज़ियल अटेरेजिया नामक बीमारी का ऑपरेशन एक ही बार में किया जाता है। इस केस में जटिलता के कारण दो चरण में सर्जरी की गई। बच्ची अब सामान्य तरीके से दूध पी रही है। डॉ. मलेठा ने बताया कि अल्ट्रासाउंड से गर्भस्थ शिशु में विकृतियों का पता लग सकता है। इससे शिशु का उपचार भी किया जा सकता है।
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