मौत के अगले दिन कब्र से बच्ची का शव गायब होने का रहस्य और गहराता जा रहा है। पता चला है कि राजधानी में पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं। अभी तक सामने आए पूर्व के दो मामलों का जो घटनाक्रम है, उनमें भी वैश्य नर्सिंग होम और कब्रिस्तान का जिक्र है। सभी घटनाओं में नवजातों के शव दफनाने के अगले या तीसरे दिन गायब हो गए। हैरान करने वाली बात है कि सभी घटनाएं पुलिस के संज्ञान में आ चुकी हैं, बावजूद इसके अब तक पुलिस ठोस साक्ष्य हासिल नहीं कर सकी है। गाहे-बगाहे पुलिस पर भी आरोप लग रहे हैं कि वह गंभीर मामले पर जानबूझकर पर्दा डालने में लगी है।
पुलिस पर लग रहे आरोप अधिकारियों की सुस्ती से और भी मजबूत हो रहे हैं। दरअसल, शुरुआत में उच्चाधिकारियों ने मामले को गंभीर तो माना था, लेकिन अब इसकी जांच पर निगरानी में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। सूत्रों से पता चला है कि घटना सामने आने के अगले दिन एक उच्चाधिकारी ने पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए थे। मगर, कुछ ही देर में उन्होंने ये आदेश वापस भी ले लिए। ऐसे में साफ है कि कहानी में कहीं न कहीं पुलिस की ओर से भी गंभीरता को नजरअंदाज किया जा रहा है। जबकि अब पूर्व की दो कहानियों के सामने आने के बाद मामला पहले से ज्यादा गंभीर लग रहा है। माना जा रहा है कि यदि पुलिस इस प्रकरण की तह तक जाती है तो कुछ बड़ा चौंकाने वाला तथ्य सामने आता।
रुड़की के संजय के आज भी छलक जाते हैं आंसू
रुड़की निवासी संजय पाठक के साथ भी गौरव आहूजा जैसा ही हादसा हुआ था। संजय पाठक ने फोन पर बताया कि 13 जून 2015 को गर्भावस्था के दौरान उनकी पत्नी की अचानक तबीयत खराब हो गई थी। चिकित्सकों ने शरीर की कुछ अंदरूनी समस्या बताई और उनकी पत्नी को हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी थी। इस बीच संजय अपने बड़े भाई व बहन के कहने पर देहरादून स्थित वैश्य नर्सिंग होम में पत्नी को ले आए। यहां उनकी पत्नी ने 16 जून को बेटे को जन्म दिया, जिसकी 19 जून को मौत हो गई।
अस्पताल कर्मचारियों ने उनसे कहा कि ‘नर्सिंग होम का स्वीपर आपके साथ जाएगा और बच्चे को दफनाने में आपकी मदद करेगा’। इस पर संजय उनके साथ रायपुर के नालापानी क्षेत्र में उस कब्रिस्तान में गए और बच्चे को दफना दिया। संजय तो घर चले गए, लेकिन अपनी बहन को कब्र पर तीन दिनों के तक दूध चढ़ाने के लिए कह गए। दो दिनों तक उनकी बहन ने दूध चढ़ाया, लेकिन तीसरे दिन जैसे ही वे कब्र पर पहुंची तो देखा कि बच्चे का शव गायब है। इसकी शिकायत उन्होंने उस वक्त रायपुर थाने में की, मगर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दिल्ली शिफ्ट हो गई महिला
जानकारी मिली है कि जीएमएस रोड स्थित आशीर्वाद एंकलेव निवासी एक महिला के साथ इसी तरह की घटना हुई थी। बच्चे को जन्म दिया और अगले दिन बच्चा मरा तो अस्पताल के स्वीपर की मदद से उसे दफना दिया गया। बताया जा रहा है कि महिला अब अपने परिवार के साथ दिल्ली शिफ्ट हो गई है।
एडीजी से मिले परिजन
विजय पार्क निवासी गौरव आहूजा अपने परिवार के साथ मंगलवार को एडीजी (लॉ एंड ऑर्डर) अशोक कुमार से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने पूर्व की दो कहानियों को एडीजी को बताया और मामले की गंभीरता से जांच कराने की मांग की। इस पर एडीजी ने उन्हें जल्द जांच पूरा कराने का आश्वासन दिया।