भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट का कहना है कि पार्टी विधायक संजय गुप्ता ने सीएम पर सीधे हमला बोलकर अनुशासनहीनता की है। पार्टी अनुशासन में लाभ-हानि नहीं देखती। लेकिन, देहरादून में पार्टी विधायकों के सरकार के अतिक्रमण अभियान को चुनौती देने को वह अनुशासनहीनता नहीं मानते हैं। उनका कहना है कि विधायक सरकार के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि जनता के समर्थन में हैं।
भट्ट का कहना है कि सबको दायित्व नहीं बांटे जा सकते। उन्हीं के पास दायित्व के लिए ढाई हजार से ज्यादा आवेदन पहुंच चुके हैं। आम पार्टी पर पूर्व सीएम हरीश रावत की टिप्पणी पर भट्ट ने कहा कि वह उनसे कभी छुप-छुप कर नहीं मिले। वह रावत से मिलना ही पसंद नहीं करते थे। प्रदेश की राजनीति में ऐसे कई अन्य मसलों पर ‘अमर उजाला’ के मुख्य संवाददाता राकेश खंडूड़ी ने भट्ट से बातचीत की। पेश से बातचीत के प्रमुख अंश:-
सवाल- विधायकों की नाराजगी क्यों? क्या वाकई सीएम विधायकों को समय नहीं दे रहे हैं। आपके स्तर पर क्या प्रयास हुए?
जवाब-सीएम ने विधायकों से मिलने के लिए अलग से दिन निर्धारित किए हैं। विधायकों को किसी भी समय मिलने से नहीं रोका जा सकता है। लंबी वार्ता के लिए पृथक से दिन हैं। यह मुख्यमंत्री जी ने खुद तय किया है। इसलिए यह कह देना सही नहीं है कि समय नहीं मिल रहा है।
सवाल: लेकिन संजय गुप्ता भी क्षेत्र की उपेक्षा को लेकर ही नाराज हैं?
जवाब: संजय गुप्ता की बात इसलिए गलत थी कि उन्होंने व्यक्तिगत तरीके से प्रदेश के मुखिया पर सीधे-सीधे वार किया। उनसे यह चूक हुई है। उन्होंने प्रेस को फोन किया और बयान दिया कि झोटा बिरयानी में जा रहे हैं, हमारे यहां नहीं आ रहे हैं। सीएम इत्तफाक से नहीं जा पाएं होंगे। मैंने उनसे पूछा था। कभी मैं ही नहीं जा पाता हूं। सीएम के बारे में टिप्पणी अनुशासनहीनता की श्रेणी में आती है। पार्टी अनुशासन के कारण ही जानी जाती है। पार्टी अनुशासन में लाभ-हानि नहीं देखती है। प्रेस में इस तरह से जाना मुख्यमंत्री को बदनाम करना है। इसलिए नोटिस भेजा है। उत्तर आने का इंतजार है।
सवाल- व्यथित विधायक जब सीधे मीडिया में जा सकते हैं तो वह कांग्रेस के पास भी जा सकते हैं, ऐसे में सरकार क्या संकट में नहीं पड़ेगी, वह अपनी पीड़ा आपसे भी सुना सकते थे ?
जवाब- ऐसा कुछ नहीं है। हमारे विधायक समझदार हैं। वे पार्टी की रीति-नीति को जानते हैं। मुझसे विधायकों ने कभी इस तरह की बात नहीं की। विधायक ने कभी नहीं कहा कि उन्हें समय नहीं दिया जा रहा है। जहां तक कार्यों की बात है तो जितना संभव है, वे हो रहे हैं।
सवाल: विधायक संजय गुप्ता को पार्टी ने नोटिस दिया कि उन्होंने अनुशासन तोड़ा, लेकिन अतिक्रमण पर विधायक सरकार को चुनौती दे रहे हैं कि विधायकी रहे या न रहे वे अतिक्रमण विरोधी अभियान का विरोध करेंगे?
जवाब: शहर के विधायकों की मजबूरी थी। वे सरकार के खिलाफ नहीं बैठे थे। वह जनता को भरोसा दिलाने बैठे कि वे उनके साथ हैं। उन्हें अपनी विधानसभा देखनी है। लोगों के संकट भी देखने हैं। जब वह उनके साथ खड़ा होगें तभी उन्हें उनके वोट मिलेंगे। मन तो हमारा भी करता है कि हम भी खड़े हो जाएं। लेकिन बाध्यता है। हम खड़े नहीं हो सकते। दु:ख भी नहीं देखा जाता है। आदेश न्यायालय का है, तो पालन करना ही होगा।
सवाल: पार्टी विधायक बार-बार यह आरोप लगाते हैं कि नौकरशाही बेलगाम हो गई है, आप क्या मानते हैं?
जवाब: नौकरशाही बेलगाम नहीं है। वह पूरी तरह से नियंत्रण में है। लेकिन अतिक्रमण के मामले में कुछ जेई और एई की शिकायतें आईं कि वह डराने की कोशिश कर रहे हैं, यह व्यवहार नहीं होना चाहिए।
सवाल: पार्टी में नाराजगी की एक प्रमुख वजह दायित्व को लेकर भी मानी जा रही है, दो मंत्री पद भी नहीं भरे गए हैं?
जवाब: जो संवैधानिक और अहम 50 दायित्व हैं, उन्हें सरकार देगी। हमारे कार्यकर्ताओं में कोई असंतोष नहीं है। हमारा कार्यकर्ता दीन दयाल उपाध्याय की पार्टी का कार्यकर्ता है। यह कहना कि कार्यकर्ता नाराज है, गलत है। मेरे पास ही दायित्व के लिए ढाई हजार आवेदन पहुंचे हैं। लेकिन सबको दायित्व नहीं दिया जा सकता।
सवाल: कहा जा रहा है कि हरिद्वार में भाजपा नेतृत्व पूर्व बसपा नेता शहजाद पर पार्टी डोरे डाल रहा है?
जवाब: हमें डोरे डालने की जरूरत नहीं है। हमारे पास 57 विधायक हैं। पार्टी की 11 लाख की सदस्यता पार होने जा रही है। शहजाद को पार्टी में शामिल कराने का मेरे पास कोई प्रस्ताव नहीं आया है।
सवाल: चर्चा है कि हरिद्वार लोस से पीएम नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ सकते हैं? ये सारा गेम प्लान उन्हीं के लिए हो रहा है?
जवाब: ऐसी कोई चर्चा नहीं है। कभी ऐसी चर्चा नहीं हुई। मोदी तो हमारे वैश्विक नेता है। वह जहां से लड़ें। काश! ऐसा हो जाए, यह तो हमारा सौभाग्य होगा। यदि ऐसा होता तो हमें किसी से बात करने की क्या जरूरत है। उनके लिए देश के कोने-कोने से आफर आ रहे हैं।
सवाल: आपका अध्यक्ष कार्यकाल अब पूरा होने जा रहा है, चर्चा है कि आपकी नैनीताल लोकसभा से चुनाव लड़ने की तैयारी है?
जवाब: मैंने आज तक पार्टी को धर्मसंकट में नहीं डाला। कोई पद की डिमांड नहीं मांग की। मैंने चुनाव हारने के बाद अध्यक्ष इस्तीफा दे दिया था। मुझे कहा गया कि कभी-कभी कप्तान भी हिट विकेट होता है। पार्टी उपयोग समझेगी तो कोई काम देगी। मैं एक बात को मानता हूं जो भाग्य में है वह आता ही आता है।
सवाल: आम पार्टी पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने सोशल मीडिया में लिखा कि नेता प्रतिपक्ष रहते हुए आप उनसे छुप-छुप कर मिलते थे व खिलखिलाते थे ?
जवाब: मैं उनसे छुप कर कभी नहीं मिला। मैं उनसे मिलना ही पसंद नहीं करता था। उनके पास जाता ही नहीं था। वो काम नहीं करते थे। उन्होंने हमारे विधायकों के क्षेत्रों की समीक्षा कभी नहीं की। जब हमने बहुत हल्ला-गुल्ला किया तो उन्होंने लिखित में दिया कि वह अगले महीने से समीक्षा करेंगे, लेकिन वह महीना कभी नहीं आया। मैं सिर्फ उनसे मिला हूं, जब नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री को सूचना आयुक्त की बैठक में रहना होता था।