उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया की निगाहें भारत के योग व आयुर्वेद पर हैं। अब तो अमेरिका में भी मेड इन यूएस और मेड बाई अमेरिका के सिद्धांत पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि योग, आयुर्वेद एवं स्वदेशी को लेकर जो गतिविधियां पतंजलि की ओर से चलाई जा रही हैं, उसे अब पूरी दुनिया अपना रही है।
स्वामी रामदेव ने कहा कि इस प्रतिकृति को बनाने में लगभग 200 कलाकारों का पुरुषार्थ तथा लगभग दो करोड़ रुपये की लागत आई है। यह कास्ट का विषय नहीं हैं, यह एक कॉन्सेप्ट है। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में व्यक्ति नहीं व्यक्तित्व की पूजा करो, चित्र नहीं चरित्र की पूजा करो। इसलिए हमने इसको न कोई मूर्ति बोला, न इसकी पूजा की और न ही कोई प्राण प्रतिष्ठा की, यह मात्र प्रेरणा के लिए है।