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आतंकवाद को लेकर योगगुरु बाबा रामदेव ने कहा, 'क्रांति के बाद ही शांति आती है'

Tue, 12 Mar 2019 08:26 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
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रामदेव - फोटो : एएनआई फाइल फोटो
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योगगुरू बाबा रामदेव ने कहा कि क्रांति के बाद ही शांति आती है। उन्होंने कहा कि आज आतंकवाद से सख्ती से निपटने की जरुरत है। वे हरिद्वार में भारत माता मंदिर की ओर से आयोजित भारतमाता आराधना महायज्ञ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

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उन्होंने कहा कि स्वामी सत्यमित्रानंद गिरि महाराज ने देश में नयी दृष्टि और सृष्टि का सृजन किया है। राष्ट्र धर्म को श्रेष्ठ मानने वाला कोई संत ही हो सकता है। उन्होंने कहा कि देश को राष्ट्रभक्त लोगों की आवश्यकता है चाहे वह किसी भी मजहब के हों।
 

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'200 मुल्कों में से सबसे अच्छा हमारा भारत देश'

इस्लामिक धर्मगुरू कोकब मुस्तफा ने कहा कि दुनिया के 200 मुल्कों में से सबसे अच्छा हमारा भारत देश है। हमारा मुल्क शांति का दूत है। आतंकवादी का कोई ईमान नहीं होता है। इस्लाम शांति और अमन का पैगाम देता है।

भारत माता मंदिर के संस्थापक स्वामी सत्यमित्रानन्द गिरि जी महाराज ने अमर शहीदों को नमन करते हुए भारत माता से अपने सैनिकों को बल देने की प्रार्थना की। विश्व शांति सभागार में हुए सत्र को संबोधित करते हुए जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज ने कहा कि वीर सैनिकों का बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। उनके शौर्य से ही भारत माता की रक्षा होती है। इस कारण यह राष्ट्र रक्षा सम्मेलन अपने वीर सैनिकों को समर्पित है।
 
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'राष्ट्रभक्ति सबको दिल से करनी चाहिए'

स्वामी चिदानन्द मुनि ने कहा कि इष्टदेव की भक्ति अपनी-अपनी पद्धति से करें, लेकिन राष्ट्रभक्ति सबको दिल से करनी चाहिए। एक सैनिक किसी संत से कम नहीं है। वह सीमा पर ईश्वरीय कार्य कर रहा है।

युगपुरूष स्वामी परमानन्द महाराज ने कहा कि सबके प्रति जो प्रेम रखे वही परमात्मा को प्रिय होता है। हमारे वीर सैनिक पूरे देश को सुरक्षित रखने के लिए अपनी जान की बाजी लगा देते हैं। इस अवसर पर भानू पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी दिव्यानंद तीर्थ महाराज, महामंडलेश्चर स्वामी अखिलेश्वरानन्दस्वामी, अर्जुन पुरी,  स्वामी हरिचेतनानन्द,  स्वामी श्यामसुन्दर दास शास्त्री,  स्वामी विवेकानन्द,  स्वामी कैलाशानन्द ब्रह्मचारी, स्वामी अध्यात्मनन्द, महंत कमल दास, भक्त दुर्गादास, स्वामी मनीषानन्द, श्रीमहंत ललितानन्द, ट्रस्ट के मुख्य न्यासी आईडी शर्मा शास्त्री, श्रीमहंत ललितानन्द, सुरेश केडिया, संतोष अग्रवाल, शरद पुरोहित मौजूद रहे।
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