इसलिए जनमानस की भावना का सम्मान करते हुए सरकार को चाहिए कि वह अब मंदिर निर्माण में देरी न करें। क्योंकि कोर्ट में सुनवाई के चलते पहले ही इस मामले में बहुत ज्यादा देर हो चुकी है।
अब जनमानस के सब्र का बांध टूटता जा रहा है। इस भावना को समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का मुद्दा न तो जमीन हस्तांतरण का मुद्दा है और न ही टाइटल निर्धारित होने का मुद्दा है। यह जमीन का नहीं जमीर का मुद्दा है।
जब सरकार अस्पतालों के लिए, स्कूल, कॉलेजों और एयरपोर्टों के लिए जमीन का अधिग्रहण कर सकती है तो राम मंदिर के लिए जमीन का अधिग्रहण क्यों नहीं किया जा सकता ।
उन्होंने कहा कि राम भारत की संस्कृति, आत्मा और भारतीय जनमानस के अस्था पुरुष है। इस समय जबकि केंद्र में भी भाजपा की सरकार है और देश के अधिकतर राज्य भी भाजपा द्वारा शासित हैं।
ऐसे में अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर निर्माण का प्रस्ताव संसद में लेकर आते हैं तो उन्हें नहीं लगता कि कोई भी उसका विरोध करेगा। क्योंकि देश में हर किसी का विरोध हो सकता है, लेकिन राम का कोई विरोधी नहीं है।