जड़ी बूटियां केवल भारत में ही नहीं होतीं, बल्कि तमाम दुनिया में पाई जाती हैं। विशेष बात यह है कि भारत ऐसा अकेला ऐसा देश है जिसने आयुर्वेद पर सबसे पहले काम किया और जानकारी हासिल की।
दुनियाभर की जड़ी बूटियों का एक ग्रंथ एनसाइक्लोपीडिया के रूप में पतंजलि योगपीठ ने तैयार किया है। इसका लाभ अब पूरे विश्व को मिलेगा।
आचार्य बालकृष्ण ने बताया कि योग और आयुर्वेद के साथ अनुसंधान को जोड़कर अनेक विधाओं की खोज की जा रही है। इन दोनों के साथ पहले अनुसंधान नहीं जुड़ा हुआ था। परिणामस्वरूप योग और आयुर्वेद के प्राचीन मूल्य ही चले आ रहे थे।
स्वामी रामदेव के साथ मिलकर उन्होंने योग के क्लीनिकल ट्रायल्स के माध्यम से योग का दुनिया भर में प्रचार किया। उसी प्रकार पतंजलि में स्थापित विश्वस्तरीय अनुसंधान केंद्र में जड़ी बूटियों पर व्यापक शोध किया जा रहा है। शोध के इस कार्य का अवलोकन अनेक देशों के वैज्ञानिकों ने यहां आकर किया। उन सभी ने आयुर्वेद का लोहा माना।
पतंजलि का प्रयास है कि चीन के साथ साथ दुनिया के कुछ अन्य देशों के साथ ही अनुसंधान के कार्य को आगे बढ़ाया जाए। साथ ही जो जड़ी बूटियां भारत में कम मिलती हैं, उनकी खोज दुनिया के अन्य देशों में की जाए। आचार्य ने बताया कि पतंजलि ने संजीवनी बूटी पर विशेष अनुसंधान कार्य किया है। शीघ्र ही विश्व के लोगों को इस अनुसंधान का लाभ मिलेगा।