दिल्ली रामलीला मैदान की घटना के बाद बाबा रामदेव ने केंद्र सरकार के विरुद्ध भ्रष्टाचार और कालेधन को लेकर चौतरफा हमला बोल दिया था। कांग्रेस ने भी बाबा को नहीं बख्शा।
केंद्र और प्रदेशों की सरकारों ने बाबा को कुल मिलाकर 442 नोटिस भेजे। अब मोदी सरकार आ जाने पर माना जा रहा है कि इन कार्रवाईयों से बाबा को काफी हद तक राहत मिल जाएगी।
आयकर विभाग ने बाबा के प्रतिष्ठानों और ट्रस्टों की बहुत कड़ी घेराबंदी की तथा दर्जनों नोटिस थमा दिये।
खातों तक से वसूल लिया जुर्माना
एक मामले में तो तब हद ही गयी तो जब भारी जुर्माना ठोकने के खिलाफ बाबा कोर्ट गये और केंद्र के एक विभाग ने विशेष आदेश जारी कर मध्य हरिद्वार स्थित आचार्य के बैंक खाते से मोटी रकम वसूल कर ली। यह मामला अभी भी न्यायालय में है।
उत्तराखंड की प्रदेश सरकार ने बाबा के प्रतिष्ठानों पर जमकर शिकंजा कसा। बाबा को नोटिसों का जवाब देने और अदालतों में मुकदमे झेलने के लिये पूरे 11 विशेषज्ञों की एक टीम गठित करनी पड़ी जो आज भी काम कर रही है।
बाबा को भी अच्छे दिन की उम्मीद
यद्यपि नरेंद्र मोदी ने कईं बार कहा है कि वे कानूनी कार्रवाईयों में हस्तक्षेप नहीं करते, तो भी पतंजलि परिवार को उम्मीद है कि अनेक मामले स्वत: ढीले पड़ जाएंगे।
बाबा का साफ-साफ कहना है कि नरेंद्र मोदी, अमित शाह, आचार्य बालकृष्ण तथा खुद उन्हें जेल भेजने की तैयारी कांग्रेस ने की थी। अंतत: कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी। बाबा अब खुद भी अच्छे दिनों की उम्मीद लगा रहे हैं।
जान बूझकर जुल्म ढाती रही कांग्रेस: बालकृष्ण
कांग्रेस पार्टी को पता था कि रामदेव उसकी सत्ता पलट सकते हैं। देशव्यापी यात्राएं कर बाबा ने लाखों किमी नाप डालें। जैसे-जैसे बाबा के शिविर लगते गये, नोटिसों और कार्रवाईयों के माध्यम से कांग्रेस के जुल्म बढ़ते चले गये।
भारत सरकार के अनेक उच्चाधिकारी मान चुके हैं कि 98 प्रतिशत कार्रवाई बदले की भावना से हुई। दो प्रतिशत कार्रवाई के पीछे केवल तकनीकी कारण थे। कांग्रेस के शासन काल में कोई सुनने वाला भी नहीं था।
अनेक मामलों में न्यायालयों ने नोटिसों की हकीकत समझ ली। निश्चय ही भ्रष्ट सरकार के जाने से अपनी बात रखने में अब मदद मिलेगी। पतंजलि के सभी प्रतिष्ठान और व्यक्ति बेदाग साबित होंगे।
-आचार्य बालकृष्ण, महामंत्री पतंजलि योगपीठ