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सरकार ने कराया योगगुरू को अनुलोम-विलोम

Thu, 21 Nov 2013 05:02 PM IST
अनूप वाजपेयी/अमर उजाला, देहरादून
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लंबे समय से कांग्रेस नेताओं व सरकारों को शीर्षासन कराने वाले योगगुरू की सांसे(अनुलोम-विलोम) उत्तराखंड सरकार ने बढ़ा दी है। एक साथ 81 मामले दर्ज कराकर उनके राजनीतिक मंसूबे पर ब्रेक लगाने की कोशिश की है।
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा इसका कोई दूसरा अर्थ नहीं निकालने की बात कहते हैं, लेकिन सरकार की यह कार्रवाई ऐसे समय पर हुई जिसके राजनीतिक मायने-मतलब तो निकाले ही जाएंगे।

मुख्यमंत्री ने कसा तंज
मुख्यमंत्री भले ही इसे प्रशासनिक मामला कह रहे हों लेकिन यह कहने से भी नहीं चूके कि नैतिकता की बात करने वाले को यह भी समझना पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने रामदेव के बैकग्राउंड और उनके कारनामे पर भी तंज कसा है।
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अगर मान भी लिया जाए कि सरकार ने किसी विद्वेष भावना से काम नहीं किया है तो साफ है कि सालों पुराने मामलों की छानबीन की बुनियाद करीब छह महीने पहले जिलाधिकारी के तबादले के साथ पड़ गई थी।

डीएम निधि पांडेय ने रामदेव के ट्रस्ट से जुड़े सभी प्रतिष्ठानों से संबंधित दस्तावेज खंगलवाये जिसका नतीजा सामने है। मुख्यमंत्री ने धांधली का पर्दाफाश करने वाली जिलाधिकारी निधि पांडेय को बधाई दी है।

दिल्ली में बैठे नेताओं को मिलेगा सुकून
जिस समय बाबा रामदेव पूरे देश में घूमकर कांग्रेस केखिलाफ अभियान छेड़े हैं उस समय उत्तराखंड सरकार का यह खुलासा दिल्ली में बैठे कांग्रेस के नेताओं को सुकून दे सकता है।

रामदेव और कांग्रेस के बीच छत्तीस का आंकड़ा तभी से है जब बाबा ने रामलीला मैदान में अपना डेरा जमाया था और फिर उन्हें वहां से खदेड़ा गया।

राजनीतिक नुकसान हो सकता है
बाबा की भाजपा के प्रति पक्षधरता को देख कांग्रेस कहीं न कहीं यह मान रही थी कि उसका राजनीतिक नुकसान हो सकता है। उत्तराखंड सरकार ने बाबा को शायद यही बताने की कोशिश की है कि जिनके घर शीशे के होते हैं वह पत्थर नहीं फेंकते।

रामदेव पर शिकंजा कसते ही उत्तराखंड भाजपा नेताओं के बयान उनके पक्ष में आने लगे हैं केंद्र के नेता भी शायद इसे विद्वेष की भावना से की गई कार्रवाई बताएं लेकिन उत्तराखंड सरकार ने बाबा के खिलाफ जो मोर्चा खोला है उसकी लड़ाई लंबी और जटिल होगी देखना है भाजपा किस हद तक खड़ी होगी।
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