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डोली में बैठकर कैलाशधाम को निकले बाबा केदारनाथ

Wed, 30 Apr 2014 06:47 PM IST
अमर उजाला, ऊखीमठ, गुप्तकाशी
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भोले बाबा के जयकारों के साथ भगवान केदारनाथ की उत्सव डोली ने बुधवार को शीतकालीन गद्दीस्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ से केदारपुरी के लिए प्रस्थान किया।
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डोली विभिन्न स्थानों पर भक्तों को दर्शन देते हुए प्रथम प्रवास गुप्तकाशी पहुंच गई है। जहां पर स्थानीय लोगों ने डोली का भव्य स्वागत किया। गुरुवार को डोली गुप्तकाशी से दूसरे पड़ाव फाटा को रवाना होगी। केदारनाथ मंदिर के कपाट चार मई को खुलेंगे।

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बुधवार सुबह ब्रह्म बेला पर गर्भ गृह में केदार बाबा की पंचमुखी मूर्ति की पूजा-अर्चना की गई। पूजा अर्चना के बाद मूर्ति को गर्भ गृह से सभामंडप में लाया गया।
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यहां पुजारियों, वेदपाठियों और हक हकूधारियों द्वारा मूर्ति और डोली का श्रृंगार व आरती उतारी गई। तत्पश्चात मूर्ति को डोली में रखा गया।

रावल ने मुख्य पुजारी को सौंपा मुकुट

इस मौके पर परंपरानुसार केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग ने केदारनाथ के मुख्य पुजारी टी गंगाधर लिंग को केदारनाथ की पूजा का दायित्व देते हुए मुकट और चाबी सौंपी। रावल ने पुजारी को मंदिर में पूजा का संकल्प करवाया।

मंदिर की एक परिक्रमा करने के बाद उत्सव डोली प्रात: नौ बजे पांच सिख रेजीमेंट की बैंड टुकड़ी की धुनों व भक्तों के जयकारों के साथ केदार धाम की ओर रवाना हुई।

विद्यापीठ में संस्कृत महाविद्यालय और फार्मेसी कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने डोली का स्वागत किया। डोली भैंसारी, गुप्तकाशी होते हुए अपराह्न एक बजे रात्रि विश्राम के लिए विश्वनाथ मंदिर पहुंची।

इस मौके पर केदारनाथ विधायक शैलारानी रावत, केदारसभा अध्यक्ष शंकर प्रसाद बगवाड़ी सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे।

केदारनाथ यात्रा : कुछ तेजी कुछ सुस्ती

इस साल की केदारनाथ धाम के लिए असली यात्रा गौरीकुंड से पांच किमी पहले सोनप्रयाग से शुरू होगी। यहां से लगभग चार किमी तक सड़क है। इसके बाद धाम के लिए पैदल मार्ग है।

यात्रा मार्ग में चल रहे काम में तेजी आई है लेकिन कुछ स्थानों पर जो स्थिति दो सप्ताह पहले थी, अभी भी वही है। घोड़ा पड़ाव, रामबाड़ा में पैदल मार्ग की स्थिति वैसी ही है।

यदि निम जंगल चट्टी में अपने मजदूर नहीं देता तो शायद ही यहां कुछ काम हो पाता। बाजार से करीब तीन सौ मीटर आगे सोनगंगा और मंदाकिनी के संगम पर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा वैली ब्रिज एबटमेंट को दोनों नदी के कटाव से बचाने के लिए दीवार बनाई जा रही है।

ऐसा है अभी तक रास्तों का हाल

इससे आगे नदी तल से गुजर रहे सड़क को सुरक्षित करने के लिए सिंचाई विभाग दीवार बना रहा है। लेकिन असल चिंता मुंडकटिया में नेशनल हाईवे से जुड़ने वाली कैंची बैंड है। यहां स्रोत का पानी निकलने से कीचड़ हो रहा है। वाहन एक बार में ही आगे नहीं निकल पा रहे हैं।

यहां से गौरीकुंड पैदल मार्ग को जोड़ने के लिए लोक निर्माण विभाग ने चार सौ मीटर नया मार्ग बनाया है। इसके बनने से निर्माण सामग्री ले जाने में आसानी हुई है। लेकिन गौरीकुंड घोड़ा पड़ाव अभी स्थित‌ि ठीक नहीं हो पाई है।

रामबाड़ा में मार्ग बन चुका है। लेकिन नदी में उतरने के लिए एप्रोच रोड नहीं बनाई गई है। इससे आगे एनआईएम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) उत्तरकाशी रास्ता बना रही है।

एनआईएम ने रामबाड़ा से लिनचोली के बीच कई स्थानों पर चार मीटर चौड़ा रास्ता बना दिया है। आरसीसी दीवार खड़ी कर रास्ता बनाया जा रहा है। जो शायद ही लोनिवि ने कभी बनाया हो।

यात्रियों को ल‌े जाएगा हेलीकॉप्टर

छोटा लिनचोली होते हुए रामबाड़ा से करीब पांच किमी ऊपर बड़ी लिनचोली पूरे पैदल मार्ग इकलौता स्थान है, जहां तीर्थ यात्रियों के रुकने के लायक थोड़ी बहुत जगह है। जो स्थान पहले रामबाड़ा का था, बड़ी लिनचोली का हो चुका है।

प्रशासन भी इसको यात्रा मार्ग का मुख्य पड़ाव बना रहा है। यहीं से ही यात्रियों को चॉपर केदारनाथ ले जाया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि केदारनाथ और बड़ी लिनचोली में रहने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है।

यदि हेलीकाप्टर से यात्री लिनचोली से आएगा-जाएगा तो उसका वक्त बचेगा और वह वापस सोनप्रयाग या गुप्तकाशी पहुंच सकता है। इसके अलावा बड़ी लिनचोली से ही केदारनाथ से खड़ी चढ़ाई शुरू होती है।

लिनचोली में निम ने हेलीपैड का निर्माण कर दिया है। पूर्व में यहां एमआई-17 हेलीकाप्टर उतारने की योजना थी, लेकिन लैंडिंग और टेक ऑफ करने लायक यह घाटी उपयुक्त नहीं है। हेलीपैड में तीन हेलीकाप्टर उतर सकते हैं।

बर्फ पिघनले से रास्तों पर चलना मुश्किल

बड़ी लिनचोली से करीब डेढ़ किमी ऊपर भी निम के टेंट लगे हुए हैं। वर्तमान में निम यहां खंड़जा बिछा रहा है। बाद में बड़ी लिनचोली के ऊपर भैरव चट्टी से सीधा मार्ग बनाया जाएगा। जिससे चढ़ाई खत्म हो जाएगी।

देवदर्शिनी से केदारनाथ धाम तक करीब दो किमी तक बर्फ के बीच बनाए गए रास्ते के ऊपर चलना पड़ रहा है। दिक्कत यह है कि धूप निकलने पर बर्फ गलने लगती है, जिससे फिसलन हो जाती है।

ऊर्जा निगम भैरवचट्टी तक लाइन खींच चुका है। बड़ी लिनचोली से ऊपर स्ट्रीट लाइट लग चुकी है। रामबाड़ा से बड़ी लिनचोली के बीच रास्ता निर्माण होने के कारण अभी कुछ स्थानों पर पोल लग पाए हैं। बड़ी लिनचोली के ऊपर मोबाइल टावर लग जाए तो पूरे रास्ते में मोबाइल कनेक्टिविटी मिल जाएगी।
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आस्का लाइट से जगमगाएगा केदारनाथ धाम

ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग भगवान केदारनाथ का मंदिर आस्का लाइट, एलईडी और लड़ियों से जगमगाएगा। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की 25 आस्का लाइट गौचर पहुंच गई है।

वहीं बुधवार सुबह मंदिर समिति ने 10 कुंतल गेंदे के फूल केदारनाथ पहुंचा दिए हैं। मंगलवार देर रात समिति के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह केदारनाथ पहुंचे। वे मंदिर के कपाट खुलने तक केदारनाथ में कैंप कर व्यवस्थाएं देखेंगे।

मंदिर समिति ने सहायक अभियंता अनिल ध्यानी ने बताया कि केदारनाथ मंदिर को आस्का लाइट से रोशन किया जाएगा। उरेडा का पावर हाउस क्षतिग्रस्त होने के कारण आस्का लाइट मंगाई गई है। धाम में एक जनरेटर मिला था, जिसकी मरम्मत कर दी गई है।
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