देहरादून में अपनी आप बीती बताते-बताते सदन में बाल विधायिका रो पड़ी। बाल विधानसभा सदन में 12वीं कक्षा की बाल विधायक अधिकता ने लड़कियों की सामाजिक सुरक्षा के उस मर्म को छुआ जिसके लिए सरकारें बड़े-बड़े वादे और दावे करती रहती हैं।
नैनीताल रामनगर से विधानसभा में पहुंची विधायक ने सदन में अपने संघर्ष की कहानी रखी तो सुनकर सब सन्न रह गए। लड़कियों से छेड़छाड़ के विरोध की मुहिम में उसे अपने स्कूल के प्रबंधन से लेकर तमाम आला अफसरों के हाथों अपमानित होना पड़ा।
जिस देश में निर्भया कांड जैसी दर्दनाक घटना हो चुकी है उसी देश के छोटे से कस्बे में जब एक स्कूल की छात्रा ने बसों में लड़कियों से होने वाली छेड़छाड़ के खिलाफ मुहिम चलाई तो सब उसके दुश्मन बन गए। उसे सबसे बड़ी ठेस स्कूल की महिला प्रधानाचार्य के व्यवहार से पहुंची, जिन्होंने साथ देने के बजाय जब अधिकता ने लड़कियों की सुरक्षा के लिए रैली निकाली तो उसे बीच सड़क पर सरेआम पीटा।
रविवार को राजपुर रोड स्थित एक होटल में आयोजित बाल विधानसभा का सदन बैठा तो उसमें बाल विधायकों ने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर कई मुद्दों को उठाया। लेकिन, रामनगर से चुनी गई अधिकता बबली रौतेला का संबोधन सबसे अलग था। उसने लड़कियों से होने वाले छेड़छाड़ के विरोध को कुछ समय पहले अपने संघर्ष की कहानी से जोड़ा, जिसका हर शब्द समाज के ठेकेदार कहे जाने वालों पर प्रहार था।
रौतेला ने बताया कि बाल विधायिका होने के नाते मैंने क्षेत्र में लड़कियों के साथ हो रहे व्यवहार पर आवाज उठाई तो मामले को गंभीरता से लेने के बजाय मुझे मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है। हैरत की बात यह है कि इन हालात में जिन्हें हमारे साथ खड़ा होना चाहिए था, वही विरोधी बन गए।
उसने कहा कि गुरु, शिष्य को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाता है, लेकिन गोमती पूरन प्रसाद आर्य कन्या इंटर कॉलेज रामनगर की प्रधानाचार्य के बारे में सुनने के बाद हर बच्चे को गुरु शब्द से नफरत हो जाएगी।