फीस बढ़ोतरी को लेकर हाईकोर्ट के आदेशों का अनुपालन करने के लिए सरकार के आदेशों का भी निजी आयुर्वेद मेडिकल कालेजों पर कोई असर नहीं हुआ है। जिससे आयुष छात्रों का सब्र टूट रहा है। आयुष स्टूडेंटस मेडिकल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और सचिव आयुष को ज्ञापन भेज कर फिर से आंदोलन की चेतावनी दी है।
निजी मेडिकल कालेजों में फीस वृद्धि करने के मामले में हाईकोर्ट के आदेशों का अनुपालन करने की मांग को लेकर अक्तूबर व नवंबर 2019 में आयुष छात्रों ने 64 दिनों तक धरना प्रदर्शन किया था। छात्रों के आंदोलन को समाप्त कराने के लिए मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों की बैठक बुला कर हाईकोर्ट के आदेशों का अनुपालन करने के निर्देश दिए थे।
इस पर शासन ने आयुर्वेद विश्वविद्यालय को एक माह के भीतर आदेशों का अनुपालन कराने का समय दिया था। दो महीने बीत जाने के बाद भी निजी कालेज छात्रों पर बढ़ी हुई फीस जमा करने के लिए दबाव बना रहे हैं। यहां तक कि कई कालेज प्रबंधन 22 जनवरी से शुरू होने वाली परीक्षा में उन्हें नहीं बैठने देने की धमकी दे रहे हैं।
आयुष स्टूडेंटस मेडिकल एसोसिएशन के अध्यक्ष फैजल सिद्दीकी का कहना है कि हाईकोर्ट व सरकार के आदेशों को निजी मेडिकल कालेज मानने को तैयार नहीं है। प्रदेश के 6500 छात्र मानसिक और आर्थिक रूप से तनाव में है। सीएम को भेजे ज्ञापन में एसोसिएशन ने अवगत कराया गया कि चार जनवरी के बाद से लगातार आयुर्वेद विश्वविद्यालय व शासन से शिकायत करने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। जिससे आयुष छात्रों की दोबारा से आंदोलन का रास्ता अपनाना होगा।
फीस वृद्धि पर हाईकोर्ट के आदेशों का अनुपालन न करने वाले मेडिकल कालेजों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। इस संबंध में आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव से रिपोर्ट मांगी गई है।
- आनंद स्वरूप, अपर सचिव एवं निदेशक आयुष विभाग