ये हैं वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
-निर्माण के लिए स्वीकृत बजट को खर्च करने की अनुमति शासन से नहीं ली गई। इसका विवेचना में आकलन किया जाएगा।
-हॉस्टल के निर्माण के लिए विश्वविद्यालय के कॉपर्स फंड से 8.75 करोड़ रुपये बिना किसी अनुमति के निकाल लिए गए।
-अधिप्राप्ति नियमावली के विरुद्ध जाकर बाह्य सेवाओं पर 20.29 लाख रुपये की धनराशि अनियमित रूप से खर्च कर दी गई।
-अधिप्राप्ति नियमावली का उल्लंघन करते हुए विवि के अधिकारियों ने 28.08 लाख रुपये से विभिन्न सामग्री खरीद ली गई।
-महिला डॉक्टर को रिटायरमेंट के बाद सत्र लाभ के अंत पर नियुक्ति दे दी गई। उन्हें 33.82 लाख का अतिरिक्त भुगतान किया गया।
-संबद्धता शुल्क न लेने पर 58.30 लाख रुपये का प्रतिक्रिया शुल्क भी विवि कोष में जमा नहीं कराया गया।
-कॉलेजों से प्राप्त 298.30 लाख रुपये और 386.50 लाख रुपये सिक्योरिटी धनराशि को भी विवि कोष में जमा नहीं कराया गया।
-विजिलेंस जांच में आया कि इस पूरी धनराशि से लाखों रुपये ब्याज के रूप में विवि को मिलो थे। नहीं मिलने से वित्तीय हानि हुई।
भर्ती और दाखिले संबंधी आरोप
-आरक्षण के नियमों के साथ छेड़छाड़ की गई। रोस्टर का भी ध्यान नहीं रखा गया और भर्तियां कर दी गईं।
-नियमों को ताक पर रखकर उपनल और पीआरडी के जरिये से 180 भर्तियां कर ली गईं।
-नीट की परीक्षा के बाद सफल छात्रों को बिना काउंसिल के प्राइवेट कॉलेजों में दाखिला दे दिया गया।
- ऐसे 46 छात्रों को अनुचित लाभ दिया गया। इनका दाखिला यूजी और पीजी कोर्स में किया गया।
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