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गुलदार का खौफ और वन विभाग के खाली हाथ

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कालसी। इन दिनों कालसी तहसील क्षेत्र के व्यासभूड़ और बामनवाला क्षेत्र में गुलदार की दहशत है। बीते एक माह में गुलदार 15 से भी अधिक मवेशियों को अपना शिकार बना चुका है। दो दिन पूर्व गुलदार बामनवाला स्थित एक तिमंजिले मकान की छत पर भी नजर आया था। लेकिन गुलदार को बेहोश कर काबू में करने के लिए वन विभाग के पास न तो ट्रेंकुलाइजर गन है और न ही उसका इसका प्रयोग करने वाले विशेषज्ञ। वहीं क्षेत्र में गुलदार की बढ़ती सक्रियता लोगों में दहशत का माहौल है। बीते सोमवार को भी जब वन विभाग को साहिया क्षेत्र में गुलदार को पड़कने के लिए वन विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ी थी। ऐसे में आए दिन क्षेत्र में वन्य जीवों और मानव के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण ट्रेंकुलाजर गन का होना जरूरी हो गया है। लेकिन वर्तमान में वर्तमान में न तो चकराता वन प्रभाग और न ही कालसी भूमि संरक्षण वन प्रभाग के पास गन है।
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कई हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला है जंगल
चकराता वन प्रभाग लगभग 1.22 लाख हेक्टेयर और कालसी भूमि संरक्षण वन प्रभाग 58.55 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्रफल में फैला हुआ है। जिनमें गुलदार, रीछ, घुरड़ जैसे खतरनाथ जानवर भी हैं। आपात स्थिति में विभाग को देहरादून से गन मंगानी पड़ती है।
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2011 में गन की देरी ने ले ली थी गुलदार की जान
सन 2011 में भी लाखामंडल क्षेत्र में एक गुलदार आबादी में घुस आया था और एक घर में जा कर छिप गया था। तब भी वन विभाग को देहरादून से आने वाली ट्रेंकुलाइजर गन का इंतजार करना पड़ा था। लेकिन गुलदार के हमलावर होने पर स्थानीय लोगों ने मजबूरन उसे जलती हुई लकड़ियों से मार दिया था। स्थानीय निवासी रेखा देवी, कपिल चौहान आदि का कहना है कि वन विभाग को तत्काल दोनों प्रभागों को गन उपलब्ध करानी चाहिए। वहीं चकराता वन प्रभाग के डीएफओ दीपचंद आर्य तथा भूमि संरक्षण वन प्रभाग कालसी के डीएफओ एसपी शर्मा ने बताया कि उच्चाधिकारियों को ट्रेंकुलाइजर गन उपलब्ध कराने के लिए डिमांड भेजी गई है।
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कैसे काम करती है ट्रेंकुलाइजर गन
विशेषज्ञ पशु चिकित्सक ट्रेंकुलाइजर गन की मदद से संबंधित वन्य जीव की क्षमता के अनुसार उसके शरीर में नशीली दवा इंजेक्ट कर देते हैं। उसके असर से जब वह बेहोश हो जाता है, तो उसे पकड़ लिया जाता है। लेकिन, कालसी और चकराता वन प्रभाग के पास न तो ट्रेंकुलाइजर गन है और न ही उसके प्रयोग को विशेषज्ञ पशु चिकित्सक। वन विभाग के अफसरों का सिर्फ एक ही प्रयास है कि गुलदार जहां भी छिपा है वहां शोर मचाकर व फायरिंग कर उसे जंगल की ओर भगा दिया जाए।
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