आचार्यों, महामंडलेश्वरों, श्रीमहंतों, धर्माचार्यों और अखाड़ों के बीच स्वामी सत्यमित्रानंद ने अक्षय तृतीया (मंगलवार) को अपना भारत माता मंदिर स्वामी अवधेशानंद को सौंप दिया।
निरंजनी अखाड़े से जुड़े संत की विरासत अब जूना पीठाधीश्वर संभालेंगे। 84 वर्षीय सत्यमित्रानंद ने अपना दंड-कमंडल और कंठी-माला स्वामी अवधेशानंद को थमाई।
भारत माता मंदिर के समन्वय प्रांगण में इस दृश्य के साक्ष्य न केवल साधु-संत अपितु विदेशों से आए दोनों संतों के भक्त भी बने। दीप प्रज्ज्वलन के साथ प्रारंभ हुआ समारोह कईं घंटे चला। वक्ताओं ने इस परिवर्तन को अनूठा बताया।
कहा कि अवधेशानंद जैसे विख्यात संत को अक्षय तृतीया के दिन इससे बड़ा उपहार दूसरा नहीं मिल सकता। यह ऐसा दिन है जो दान को अक्षय बना देता है। सत्यमित्रानंद ने विश्वास जताया कि उन्होंने सेवा के जितने भी प्रकल्प संजोए हैं, उनकी रक्षा अवधेशानंद के सबल हाथ करते रहेंगे। अवधेशानंद ने कहा सत्यमित्रानंद अभी सौ वर्षों से भी अधिक रहेंगे। वह उनके शिष्य के रूप में चरण पादुकाओं की रक्षा करेंगे।
उत्तराधिकारी माने जा रहे गोविंद गिरी का छलका दर्द
भारत माता मंदिर, समन्वय परिवार और उससे जुड़े सभी ट्रस्टों का प्रभार अध्यक्ष के रूप में अवधेशानंद गिरि ने संभाल लिया है। पूर्व में जिन गोविंद गिरि को विरासत सौंपी थी उनके पास अब केवल अध्यात्मिक विरासत रह गई है। इसको लेकर उनके मन में भरा घट आखिर छलक गया।
गोविंद गिरि ने खुद कहा कि तीन वर्ष पूर्व 12 मई को गुरुदेव ने अपनी विरासत का उत्तराधिकारी उन्हें बनाया था। मैंने भी चरण पादुकाएं और कमंडल प्राप्त किए थे। तब से गुरु महाराज के चरणों में सभी दायित्व निभाता आ रहा हूं। पांच अप्रैल को गुरुदेव का आदेश मिला कि मैं अब पूजा-अर्चना करूंगा। आदेश के अनुसार एक शिष्य के रूप में ऐसा ही किया जाएगा। मन प्रफुल्लित है कि मेरे गुरुदेव को एक योग्य शिष्य मिल गया है।
गोविंद गिरि ने कहा कि वेद प्रचार करते हुए देश में ऐसे 24 वेद विद्यालय बनाए हैं जहां वेदों पर गहन कार्य चल रहा है। अपने अनुष्ठान के साथ-साथ गुरु सत्यमित्रानंद महाराज के सानिध्य में अध्यात्मिक विरासत संभालता रहूंगा। इस पर मंचासीन स्वामी सत्यमित्रानंद एवं अवधेशानंद गिरि ने विश्वास व्यक्त किया कि तीनों के समन्वय की धारा निरंतर बहती रहेगी।
300 जिलों में बनेंगे भारत माता मंदिर
जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने अपने गुरु सत्यमित्रानंद को आश्वासन दिया है कि वह पूर्वोत्तर सहित देश के तीन सौ जनपदों में भारत माता मंदिरों की स्थापना करेंगे। कुछ स्थानों पर अन्य मंदिर परिसरों में किसी एक स्थान पर इसकी स्थापना की जाएगी।
अवधेशानंद गिरि ने कहा कि उन पर जूना के साथ-साथ निरंजनी का भी दायित्व आ गया है। ऐसा होने से अखाड़ों की एकता बलवती हुई है। दोनों अखाड़ों की परंपराओं का सम्मान करता रहूंगा।
निरंजनी अखाड़े ने लगाई मुहर
जूना अखाड़े के सर्वोच्च संत को निरंजनी अखाड़े से जुड़े संत के उत्तराधिकारी के रूप में निरंजनी अखाड़े ने स्वीकार कर लिया है। निरंजनी के सचिव श्रीमहंत रामानंदपुरी ने मंच से घोषणा की है कि उन्होंने इस परिवर्तन पर अखाडे़ की मुहर लगा दी है।