उनके चेहरों पर झुर्रियां हैं, उम्र भी 79 पार हो चुकी है। ज्यादा चल-फिर नहीं सकते। मगर फिर भी वे अपने ढंग से समाज को जगा रहे हैं।
गांव, शहरी क्षेत्रों में लोगों को नशाखोरी, भ्रूण हत्या के खिलाफ लोगों को जागरूक कर रहे हैं। बीते छह महीनों से वे विवाह समारोह में इसे लेकर वर, वधू पक्ष को शपथ दिला रहे हैं। वर-वधू से कन्या भ्रूण को न मारने का वचन ले रहे हैं।
सिप्टी न्याय पंचायत क्षेत्र के ओखलढुंगा ग्राम पंचायत के पंडित शिरोमणि जोशी पुरोहित हैं। शराबखोरी की तेजी से पांव पसारती प्रवृत्ति ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। पिछले साल बिहार में हुई शराबबंदी के निर्णय ने उन्हें हिम्मत दी। रोजगारविहीन पहाड़ में बढ़ रही शराबखोरी की मार को वे खूब समझते हैं।
पंडित जी बताते हैं कि शराब ने चिंतन को गायब कर दिया है। शांत होकर सोचने-समझने की प्रवृत्ति की जगह क्रोध, हिंसा ने ले ली है। परिवार में कलह, मनमुटाव से बच्चों पर पड़ने वाला असर हो या समाज में सौहार्द, रचनात्मकता की कमी, इसके पीछे शराब बड़ा कारण रहा है।