आठ सौ से अधिक पद कई साल से खाली
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, नैनीताल आदि जिलों के सुगम क्षेत्र के विद्यालयों में तैनात शिक्षकों की सेवाओं के दुर्गम क्षेत्र की सेवा के रूप में जुड़ने से इन विद्यालयों के लिए चयनित अधिकतर शिक्षक दुर्गम क्षेत्र के विद्यालयों में जाने के लिए तैयार नहीं हैं।
यही वजह है कि इन विद्यालयों में शिक्षकों के आठ सौ से अधिक पद पिछले कई साल से खाली हैं। इन खाली पदों पर शिक्षकों की तैनाती की जा सके इसके लिए सुगम क्षेत्र में की गई सेवा को दुर्गम में न जोड़ने का निर्णय लिया गया है।
तबादलों की प्रक्रिया शुरू पर शिक्षकों की सेवा पोर्टल में नहीं हो रही अपडेट
शिक्षा विभाग में नए शिक्षा सत्र के लिए तबादलों की प्रक्रिया शुरू हो गई है। विभाग की ओर से शिक्षकों के खाली पदों की जानकारी मांगी जा रही, लेकिन अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा पोर्टल में अपडेट नहीं हो पा रही, जिससे शिक्षकों को इन विद्यालयों में कार्य के दौरान प्रोत्साहन के रूप में मिलने वाली सेवा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। शिक्षकों का कहना है कि पोर्टल में उनकी सेवा अपडेट न होने से कई शिक्षक तबादलों की जद में आ जाएंगे।
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दुर्गम क्षेत्र के शिक्षकों को लाभ मिलेगा
शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों को पहाड़ चढ़ाने के लिए अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के सुगम क्षेत्र के शिक्षकों को दुर्गम का लाभ न देने का निर्णय लिया गया है, लेकिन जो शिक्षक दुर्गम क्षेत्र के विद्यालयों में कार्यरत हैं। उनकी पहले की तरह एक साल की दुर्गम की सेवा दो साल की दुर्गम की सेवा के रूप में जुड़ती रहेगी।
सुगम और दुर्गम क्षेत्र के अटल उत्कृष्ट विद्यालयों के शिक्षकों को जब दुर्गम का लाभ मिलना है, तो शिक्षक दुर्गम में क्यों जाएंगे। हमने इस मसले पर शासन को प्रस्ताव भेजा है कि सुगम के शिक्षकों की सेवा को सुगम में ही जोड़ा जाए। -महावीर सिंह बिष्ट, निदेशक माध्यमिक शिक्षा