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अटल बिहारी वाजपेयी के निधन पर उत्तराखंड में शोक, कल बंद रहेंगे सरकारी कार्यालय व शिक्षण संस्थान

Fri, 17 Aug 2018 09:41 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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हरिद्वार में अपने दौरे के दौरान स्व. अटल बिहारी वाजपेयी - फोटो : file photo
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में श्रद्धांजलि स्वरूप उत्तराखंड में सात दिन का राष्ट्रीय शोक मनाया जाएगा। शुक्रवार 17 अगस्त को प्रदेश के समस्त राजकीय/अर्द्धशासकीय कार्यालयों और शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे। साथ ही बैंक और कोषागार भी नहीं खुलेंगे।

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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की ओर से जारी आदेश के अनुसार इस अवधि में राज्य में जहां भी राष्ट्रीय ध्वज नियमित रूप से फहराए जाते हैं, वहां ध्वज आधे झुके रहेंगे। राष्ट्रीय शोक के दिवसों में कोई भी शासकीय मनोरंजन के कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे।

उत्तराखंड से जुड़ी अटल बिहारी वाजपेयी की यादें हमेशा रहेंगी। इस पर्वतीय राज्य से उनका खास लगाव रहा है। इसी का नतीजा है कि जब इस प्रदेश के जनमानस ने सड़क पर उतरकर अलग राज्य की आवाज उठाई तो उसे अंजाम तक पहुंचाने का काम अटल ने ही किया।
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उत्तराखंड राज्य बनाने का श्रेय उन्हीं को जाता है। राज्य बनाने के साथ उनके मन में यह चिंता भी थी कि सीमित संसाधनों में यह पहाड़ी राज्य कैसे तरक्की करेगा? इस चिंता का समाधान भी उन्होंने विशेष औद्योगिक पैकेज देकर किया। तरक्की के मोर्चे पर उत्तराखंड ने आज देश में जो भी पहचान बनाई है, वह अटल बिहारी वाजपेयी के सहयोग और दृष्टि के बिना संभव नहीं थी। अटल से उत्तराखंड का यह रिश्ता हमेशा अटल बना रहेगा। 

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अटल ने बनाया मोदी जी संवारेंगे

उत्तराखंड से स्व. वाजपेयी को था बेहद लगाव - फोटो : file photo
विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने नारा दिया ‘अटल जी ने बनाया, मोदी जी संवारेंगे’। पार्टी ने इस नारे पर चुनाव लड़ा और प्रचंड बहुमत हासिल किया। उत्तराखंड में पूर्व प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व का ही जादू था कि प्रंचड मोदी लहर में भी भाजपा को अटल बिहारी वाजपेयी के नाम का सहारा लेना पड़ा। 

विकास पर सियासत नहीं की
विकास के एजेंडे पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कभी सियासत नहीं की। वर्ष 2003 में उन्होंने नए पर्वतीय राज्यों के विशेष औद्योगिक पैकेज की घोषणा की।

तब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी। एनडी तिवारी मुख्यमंत्री थे। राजनीतिक और वैचारिक भिन्नता से ऊपर उठकर उन्होंने उत्तराखंड को न सिर्फ विशेष औद्योगिक पैकेज दिया, बल्कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार को पूरा सहयोग दिया।
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