शैलेष मोहन का दावा था कि वे अखिल भारतीय वाजपेयी परिवारों के पुरोहित हैं। ऐसे में अस्थि प्रवाह का अधिकार उनका है। उन्होंने माना था कि उनके पास आगरा के समीप स्थित बटेश्वर के वाजपेइयों का रिकार्ड है। लेकिन वे अटलजी के परिवार का रिकार्ड दिखा नहीं पाए। वह गंगासभा के बुलावे पर अपनी पोथी लेकर भी नहीं गए।
दूसरे पुरोहित उपेंद्र भक्त अपनी बही लेकर गंगा सभा गए। वास्तव में वे बटेश्वर के पुरोहित है। बताया जाता है कि ग्वालियर जाने से पहले अटलजी का परिवार बटेश्वर में रहता था, लेकिन उपेंद्र की बही में भी उनके परिवार का रिकार्ड नहीं मिला।
अखिलेश शास्त्री ने यह कहते हुए गंगा सभा में जाने से इंकार कर दिया कि उन्हें अपना रिकार्ड दिखाने की आवश्यकता नहीं है। अटलजी का परिवार भली-भांति जानता है कि वे ही असली तीर्थ पुरोहित हैं। उनकी बही में हस्ताक्षर वाला रिकार्ड मौजूद है। शास्त्री ने बताया कि आज दोपहर उनके पास अटलजी के भानजे अनूप मिश्रा का फोन आ गया था। उन्होंने पूरे प्रबंध करने के लिए कहा है। अटलजी की अस्थियां वे ही प्रवाहित कराएंगे।