अटल आयुष्मान योजना में कार्ड धारक मरीजों को छोटी से लेकर गंभीर बीमारी तक निशुल्क इलाज कराने की सुविधा मिल रही है। लेकिन अस्पताल मोटी कमाई के चक्कर में साधारण बीमारी को भी गंभीर दिखाकर योजना की तस्वीर बिगाड़ रहे हैं। चिकित्सा मानकों के अनुसार जिन मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती नहीं किया जा सकता है। ऐसे मरीजों को इमरजेंसी भर्ती कर अस्पतालों ने इलाज किया है। इसके पीछे की मंशा साफ है कि इमरजेंसी में मरीज को भर्ती करने से सरकार से क्लेम की राशि मोटी होगी।
आयुष्मान योजना में कार्ड धारक मरीजों का पांच लाख तक मुफ्त इलाज कराने के लिए 1350 प्रकार की बीमारी चिह्नित हैं। लेकिन कार्ड धारक मरीज के लिए शर्त यह है कि सरकारी अस्पतालों में बीमारी के हिसाब से इलाज उपलब्ध न होने पर ही प्राइवेट हॉस्पिटल में रेफर किया जाएगा। इसमें सड़क दुर्घटना, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, प्रसव, सांप के कटाने समेत अन्य आपात स्थिति में किसी भी कार्ड धारक मरीज को सूचीबद्ध प्राइवेट हास्पिटल में सीधे इलाज की सुविधा है। इमरजेंसी में मरीज को पहले सरकारी अस्पताल में भर्ती होना जरूरी नहीं है। लेकिन मोटी कमाई करने के लिए अस्पताल साधारण बीमारी पर भी मरीज को गंभीर बताकर इमरजेंसी में भर्ती कर रहे हैं।
इमरजेंसी केस के लिए टी पिन जरूरी
आयुष्मान योजना की अनुबंध शर्तों के अनुसार इमरजेंसी में यदि कोई कार्ड धारक प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के लिए आता है तो अस्पताल को राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम से टी पिन (टेलीफोनिक पेसेंट आईडेंटिफिकेशन नंबर) लेना जरूरी है। यह नंबर कंट्रोल की ओर से कुछ मिनट में आनलाइन दिया जाता है। इसके बाद ही अस्पताल मरीज को इलाज शुरू कर सकता है।
कई फर्जी मामले आ चुके सामने
जसपुर के एक प्राइवेट हास्पिटल में कार्ड धारक 17 मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती कर इलाज किया गया। जब राज्य आष्युमान सोसायटी ने इन मामलों की जांच की तो पाया कि जिन मरीजों में इमरजेंसी में भर्ती दिखाया गया, वे इमरजेंसी के नहीं हैं। साथ ही इलाज से पहले अस्पताल ने ऐसे इमरजेंसी के मामलों में टी-पिन नहीं लिया है। इस तरह के मामले में प्रदेश के कई अस्पतालों में पकड़े गए। जिसमें साधारण बीमार के मरीज को इमरजेंसी में भर्ती किया गया।
आयुष्मान योजना में कार्ड धारक मरीज इमरजेंसी में किसी भी सूचीबद्ध प्राइवेट अस्पताल में जाकर इलाज कर सकता है। इसके लिए सरकारी अस्पताल से रेफर करने की अनिवार्यता नहीं है। लेकिन कई मामलों में यह पाया गया कि अस्पताल सामान्य बीमारी के मरीजों को भी इमरजेंसी में भर्ती कर रहे हैं। इस गड़बड़ी को रोकने के लिए अस्पताल को इमरजेंसी इलाज शुरू करने से पहले टी पिन या प्री अप्रूवल लेनी जरूरी है।
-डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, निदेशक (प्रशासन) राज्य अटल आयुष्मान योजना