चंपावत के छात्र नमन जोशी ब्लास्टर ने महज 14 साल की उम्र में ही उपन्यास लिखकर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। उनकी ओर से युवा वर्ग को ध्यान में रखते हुए लिखा गया उपन्यास ‘मैड एलियन’ विमोचन के बाद जल्द ही बाजार में उपलब्ध हो जाएगा।
जवाहर नवोदय में दसवीं के छात्र नमन महज दस साल की आयु में कविता संग्रह ‘जब खौफ गली बदल ले’ को लेकर भी चर्चाओं में थे। नमन के पिता हरीश चंद्र जोशी बेकरी चलाते हैं, जबकि माता रेखा जोशी आशा हेल्थ वर्कर हैं। नमन का कहना है कि निरंतर लिखते रहना उनकी आदत में शुमार हो गया है। वह पढ़ाई-लिखाई के अतिरिक्त समय और अवकाश के दिनों में लेखन कार्य करते हैं।
माता रेखा जोशी का कहना है कि नमन खेलकूद या टीवी देखना पसंद नहीं करता है, जब देखो वह कुछ न कुछ नया लिख रहा होता है। यही बात नमन ब्लास्टर के विद्यालय के सहपाठी छात्र-छात्राएं, दोस्त और गुरुजन भी कहते रहते हैं।
एक परिवार के साथ घटित घटना को बनाया केंद्र
नमन जोशी का कहना है कि वह इससे पहले कविता और कहानियां तो कई लिख चुके हैं, लेकिन उपन्यास लिखने का पहली बार प्रयास किया है।
चंपावत के हर्ष प्रिंटर की ओर से प्रकाशित उपन्यास ‘मैड एलियन’ में एक परिवार के साथ घटित घटना को मुख्य केंद्र बनाया गया है। नमन का कहना है कि बीते वर्ष शीतावकाश में दिल्ली में एक परिवार से हुई मुलाकात और उनके साथ हुई घटना को सुनने के बाद उन्होंने उपन्यास लिखने का मन बनाया।