ज्योतिर्विदों का मानना है कि अंक मानव जीवन को प्रभावित करते हैं। इस बार के आम चुनाव में अंकों का अनूठा संयोग इसे और दिलचस्प बना रहा है।
वोटिंग से लेकर चुनाव परिणाम तक में अंक सात का अंक महत्वपूर्ण भूमिका में है। मसलन उत्तराखंड में 7 मई को वोटिंग होनी है और परिणाम 16 मई को आएंगे।
परिणाम की तारीखों का योग भी 7 है। आइए जानते हैं कि सात नंबर और किस तरह से सत्ता की सड़क पर मील का पत्थर बन रहा है।
कुछ ऐसा होगा संयोग
7 मई - उत्तराखंड में मतदान की तारीख।
(2+0+1+4=7) - 2014 आम चुनाव का वर्ष।
(1+6=7) - 16वीं लोकसभा का होगा गठन।
7 अप्रैल - इस दिन देश में पहले चरण का मतदान।
7 वां बड़ा चुनाव - (संसदीय+विधानसभा) उत्तराखंड में। (गठन से महज 1 वर्ष पहले का आम चुनाव जोड़कर)
(7+0=7) - 70 लाख के करीब (67.81 लाख) मतदाता उत्तराखंड में।
(7+0=7) - 70 लाख रुपए आयोग ने उत्तराखंड चुनाव केलिए अतिरिक्त मंजूर किए।
ऑनलाइन सियासत भी हुई तेज
लोकसभा चुनाव पास आते ही राजनीति में रूचि रखने वाले आनलाइन रहकर अपनी पसंदीदा या विरोधी पार्टियों के बारे में ढेरों जानकारियां एक क्लिक पर हासिल कर सकते हैं।
ट्वीटर, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया पर हैश टैग के इस्तेमाल से किसी भी व्यक्ति या दल पर जनता का रूझान जाना जा सकता है। हैश टैग को बड़े राजनीतिक बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं।
स्मार्ट फोन पर कई एंड्रायड एप्लिकेशन हैं, जिनसे आप किसी भी पार्टी को फोलो कर सकते हैं। इस बार लोकसभा चुनावों में सोशल मीडिया प्रचार और कुप्रचार का बढ़ा आधार बन चुका है।
सोशल नेटवर्किंग साइट्स ट्वीटर पर हैश-टैग
सोशल नेटवर्किंग साइट्स ट्वीटर पर हैश टैग की शुरूआत किसी व्यक्ति या उत्पाद को लोकप्रिय करने के लिए पश्चिम देशों में हुई।
अब इसका इस्तेमाल राजनीतिक दल बखूबी इस्तेमाल कर रहे हैं। किसी व्यक्ति विशेष के नाम के आगे हैश लगाने से उसको लेकर जारी सभी ट्वीट्स को देखा जा सकता है।
ट्वीटर के बाद फेसबुक ने भी हैश टैग को शुरू किया है। किसी भी स्टेट्स अपडेट या फिर फेसबुक वाल पर लिखे संदेश को संबंधित विषय पर हैश लगाकर लिखा जाता है।
जैसे ही हैश टैग से उसे सर्च किया जाएगा तो उससे संबंधित किसी की वाल पर लिखे संदेश दिखने लगेंगे।
रूझान तय करेगा हैश-टैग
यह तकनीक शुरू में सेलिब्रेटिज को फोलो करने के लिए इस्तेमाल होती थी, लेकिन अब राजनीतिक दल इसको सोशल मीडिया पर प्रचार के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
हैश टैग अब रूझान तय करने की स्थिति में पहुंच चुका है, जिसका राजनीतिक दल फायदा उठा रहे हैं।
वेबसाइट पर हर लिंक मौजूद
सोशल मीडिया की ताकत का इस्तेमाल करने में भाजपा और आम आदमी पार्टी दूसरे दलों से आगे दिख रही है। आईटी टूल्स को लेकर भाजपा सर्वाधिक सक्रिय दल है।
पार्टी की वेबसाइट में वीडियो लिंक्स, इवेंट, कनेक्ट लिंक, रजिस्टर टू वोट, जॉइन द पार्टी, एप्स मिशन 272 और पोलिंग बूथ इन्फोर्मेशन है। सोशल मीडिया में भाजपा को टक्कर देने में आप भी पीछे नहीं है।
अन्ना आंदोलन और इंडिया अगेंस्ट करप्शन के समय सोशल मीडिया से आप सक्रिय है। पार्टी की बेवसाइट में न्यूज, वीडियो और ब्लॉग्स हैं।
कांग्रेस की वेबसाइट पर ट्विटर, फेसबुक, गूगल प्ले स्टोर, ऑवर विजन पिछले 10 साल में गरीबी दूर करने के उपाय दिए गए हैं।