सीबीआई कोर्ट ने रुड़की छावनी परिषद के पूर्व सहायक अभियंता शैलेंद्र भटनागर को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में चार साल के कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। भटनागर छह माह पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं। उसने टेंडर का वर्क आर्डर जारी करने के नाम पर रिश्वत ली थी।
रुड़की स्थित भारत ट्रेडिंग कंपनी के कर्मचारी मुकीम अहमद ने पांच अक्तूबर 2013 को सीबीआई को बताया था कि कंपनी के प्रोपराइटर मोहम्मद शमशाद की तरफ से रुड़की छावनी में हाई मास्ट लाइट के लिए टेंडर भरा गया था।
टेंडर निकलने के बाद सहायक अभियंता (सिविल) शैलेंद्र भटनागर वर्क आर्डर जारी करने के नाम पर पांच हजार रुपये की रिश्वत मांग रहे हैं। सीबीआई ने प्राथमिक जांच में आरोप की पुष्टि के बाद ट्रैप के लिए टीम गठित की थी और छह अक्तूबर को आरोपी सहायक अभियंता को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया था।
इसके बाद सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर सीबीआई कोर्ट में चालान पेश किया। सीबीआई के स्पेशल जज अनुज कुमार संगल की अदालत में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ लोक अभियोजक पंकज गुप्ता ने नौ गवाह प्रस्तुत किए। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर भटनागर को रिश्वत लेने का दोषी मानते हुए बुधवार को चार साल के कारावास और दस हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है।