वर्ष 2015 में एक बैठक करने के बाद तत्कालीन सरकार में दूसरी बैठक करने की जहमत नहीं उठाई। करीब तीन साल के अंतराल में नई सरकार में बैठक तो बुलाई, लेकिन अफसरों के न आने से इसे स्थगित करना पड़ा।
अधिकारियों की ये बेरुखी तब है जब परिषद की बैठक राजधानी देहरादून में बुलाई गई है। गैरसैंण की यह हकीकत सरकारों और सरकारी तंत्र की बेरुखी को बेनकाब कर रही है। एक मत यह भी था कि यह सामान्य घटना नहीं, इसके पीछे भी भाजपा की अंदरूनी राजनीति हो सकती है।
उत्तराखंड राज्य गैरसैंण विकास परिषद का गठन 2015 में हुआ था। दिसंबर 2014 में तत्कालीन सरकार परिषद के गठन को लेकर एक विधेयक लाई थी। विधेयक के तहत चमोली जिले के गैरसैंण और अल्मोड़ा के चौखुटिया विकासखंड क्षेत्र को परिषद में शामिल किया गया था। परिषद का अध्यक्ष विधानसभा अध्यक्ष को बनाया गया था।
परिषद की बैठक 2015 में हुई थी। इस बैठक में गैरसैंण और चौखुटिया के नियोजित व समन्वित विकास और अवस्थापना निर्माण को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। अधिनियम के तहत परिषद की वर्ष में चार बैठकें बुलाने का प्रावधान है, लेकिन एक बैठक के बाद फिर परिषद की दूसरी बैठक नहीं हो पाई।
अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री), सचिव ऊर्जा, पेयजल, सिंचाई, ग्राम्य विकास, आवास, नगर एवं ग्राम्य नियोजन, जिलाधिकारी चमोली, मुख्य विकास अधिकारी अल्मोड़ा और उपजिलाधिकारी गैरसैंण सूचना प्राप्त होने के बावजूद बैठक में नहीं आए।
ये अधिकारी ही आए
अपर सचिव लोनिवि, जिलाधिकारी अल्मोड़ा, मुख्य विकास अधिकारी चमोली, अधिशासी अभियंता विद्युत, अधिशासी अभियंता सिंचाई आदि उपस्थित थे।
ये दिखवाया जाएगा कि किन कारणों से अधिकारी गैरसैंण विकास परिषद की बैठक में नहीं गए। ये भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसा दोबारा न हो।
- उत्पल कुमार सिंह, मुख्य सचिव
मेरे कार्यकाल की यह पहली बैठक थी। हम गैरसैंण के विकास के मुद्दे पर बैठे थे। इस बैठक में सभी अधिकारियों को उपस्थित होना चाहिए था, लेकिन कई प्रमुख अधिकारी बैठक में नहीं आए। ऐसे में मुझे बैठक का औचित्य समझ में नहीं आया और मैंने बैठक स्थगित कर दी। सभी अधिकारियों को समय पर सूचना भेज दी गई थी। उनसे ये अपेक्षा की गई थी कि वे बैठक में उपस्थित होंगे। मैंने परिषद के सचिव, चमोली के मुख्य विकास अधिकारी से पूछा था कि क्या उन्होंने बैठक की समय पर सूचना दे दी थी, किसी भी अधिकारी ने उन्हें ये सूचना नहीं दी थी कि वे किसी कारणवश बैठक में नहीं आ पाएंगे। दोबारा बैठक बुलाई गई है, यदि इस बैठक में भी अधिकारी नहीं आएंगे तो फिर उनसे जवाब मांगा जाएगा और आवश्यक होगा तो कार्रवाई भी करेंगे।
- प्रेमचंद अग्रवाल, अध्यक्ष, विधानसभा