गैरसैंण में तीन दिन की राजनैतिक पिकनिक मनाने की तैयारी है। करीब डेढ़ साल पहले गैरसैंण में कैबिनेट की बैठक हुई थी।
गैरसैंण में विधानसभा भवन बनाने की दिशा में अभी तक कोई प्रगति नहीं है, लेकिन सरकार वहां सदन चलाने के लिए प्रतिबद्ध दिखती है।
लिहाजा आठ से दस जून तक विधानसभा का तीन दिवसीय सत्र गैरसैंण में बुलाया गया है।
विधानसभा सत्र के निकाले जा रहे राजनैतिक मायने
अब इस सत्र के राजनैतिक मायने निकाले जा रहे हैं। सरकार और विधानसभा अध्यक्ष इस सत्र को महत्वपूर्ण बता रहे हैं।
जबकि विपक्ष इसे पंचायत चुनाव से जोड़कर लोगों की भावनाओं को भुनाने का उद्देश्य बता रहा है। सरकार ने आठ से दस जून तक विधानसभा का तीन दिवसीय सत्र बुलाया है।
विजय बहुगुणा सरकार ने गैरसैंण में 3 नवंबर 2012 को पहली कैबिनेट की थी।
सतपाल महाराज ने बनाया था राजनैतिक दबाव
फिर विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल और सतपाल महाराज की ओर से बढ़े राजनैतिक दबाव को देखते हुए सरकार ने 14 जनवरी 2013 को विधानसभा भवन का शिलान्यास भी कर दिया।
हालांकि जिस बराड़ी में भूमिपूजन हुआ था वहां अब पत्थर भी नहीं है। बताते हैं अब इस जगह पर हेलीपैड प्रस्तावित है।
गैरसैंण में सत्र के लिए गढ़वाल मंडल विकास निगम के गेस्ट हाउस को बुक कर दिया गया है। गैरसैंण ब्लाक में होने वाली बीडीसी की बैठकों के लिएबने सभाकक्ष में सदन चलाने की योजना है।
इस दौरान विधायकों, अधिकारियों आदि को ठहराने के साथ ही अन्य सुविधाओं के लिए परिसर के आसपास टेंट भी लगाया जाएगा।
इनका यह कहना है
गैरसैंण में विधानसभा सत्र आहूत करने के निर्णय को राजनीति से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। राज्य सरकार जनभावनाओं के अनुरूप इस सत्र को आहूत करना चाहती है।
- हरीश रावत, मुख्यमंत्री
गैरसैंण में सत्र का जनता को कोई लाभ नहीं मिलने जा रहा है। सरकार पंचायत चुनावों के चलते लोगों की भावनाओं को भुनाने का प्रयास कर रही है। इस सत्र का और कोई उद्देश्य नहीं है।
- अजय भट्ट, नेताप्रतिपक्ष