अदालत से दोषी करार दिए गए आसाराम की तर्ज पर यहां भी एक तथाकथित बाबा ने महिला का यौन शोषण किया था। भेद खुलने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर मुकदमा दर्ज किया गया। फिलवक्त दुष्कर्मी बाबा जेल में 10 साल की सजा काट रहा है।
वर्ष 2013 के सितंबर में हुड़ैती स्थित कौशल्या देवी मंदिर के बाबा तरसेम सिंह उर्फ महंत तेज गिरी पर गांव की एक महिला के यौन शोषण का आरोप लगा था। बाबा ने महिला के साथ दुष्कर्म के बाद अश्लील क्लीपिंग भी बनाई थी। आरोप सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी बाबा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। इस बीच नगर से भागने की फिराक में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
आरोपी बाबा के खिलाफ आईपीसी के साथ ही आईटी एक्ट में केस दर्ज किया गया। इस मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने बाबा को दुष्कर्म का दोषी ठहराया। अदालत ने 22 फरवरी 2016 को दिए फैसले के तहत आरोपी को 10 साल कारावास की सजा सुनाई थी। फिलवक्त बाबा जेल में बंद है। आरोपी बाबा मूल रूप से हिमाचल के पांवटा साहिब का रहने वाला है। वह यहां लगभग 12 सालों से मंदिर में रह रहा था।
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, मगर इस देवभूमि के देवत्व में गिरावट आ रही है। इस तरह के कुछ मामले भी यहां दर्ज हैं। हालांकि अधिकतर मामले उजागर नहीं हो पाते हैं। वहीं इससे कहीं ज्यादा प्रकरण रिपोर्ट नहीं होने से दफन हो जाते हैं।
कथावाचक आसाराम की तरह ही चंपावत जिले में भी एक दुष्कर्मी बाबा है। जिसे अदालत ने सजा भी दी। पुलिस कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक झूंसी (इलाहाबाद) का रहने वाला बाबा रामचरण दास टनकपुर में एक मठ बनाकर रहता था।
2012 में इस कथित बाबा के पास मानसिक रूप से अस्वस्थ एक लड़की को परिजन लाए। लड़की को ठीक करने के बहाने बाबा ने उसके साथ दुष्कर्म किया। अदालत ने बाबा को पांच साल की सजा सुनाई।
कथावाचक आसाराम सहित कई ऐसे तथाकथित संत, मौलवी मौजूद हैं, जिन्होंने भक्तों की आस्था को डिगाते हुए विश्वास का खून किया है। बुधवार को जोधपुर की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में आसाराम को उम्र कैद की सजा सुनाई। आध्यात्म के क्षेत्र के इस बड़े नाम के अपराध के दलदल में फंसने से एक बार फिर आस्था पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। संयम और सत्यता धर्म का सार है, लेकिन अब इस पर दाग लग रहे हैं। ऐसे में आध्यात्मिक क्षेत्र के लोगों के सम्मुख भी यही सवाल है कि आखिर धर्म के भाव और आस्था के संगम को कैसे बचाया जाए। यहीं चिंता वे व्यक्त कर रहे हैं।
अंध भक्ति नहीं है धर्म: अशोक गिरि जी महाराज
चंपावत। हिंग्ला देवी मंदिर के दिगंबर 1008 अशोक गिरि जी महाराज का कहना है कि अंध भक्ति धर्म नहीं है। आस्था के बावजूद अंध भक्ति से बचते हुए विवेकपूर्ण तरीके से सही व गलत के अंतर का परीक्षण करना चाहिए।
डिगती है आस्था: महंत रमनपुरी
मानेश्वर धाम के महंत रमनपुरी महाराज का कहना है कि कथावाचक आसाराम की काली करतूत से आस्था पर चोट पहुंची है। ऐसी निंदनयी हरकत से आम लोगों की धर्म से दूरी बढ़ती है।
धर्म के चोले में काली करतूत
बाबा आदित्य दास जी कहते हैं कि आसाराम के पाप ने धर्म के चोले में काली करतूत को उजागर किया है। कथा के जरिए भक्तों को सद्मार्ग की राह बताने वाले कथावाचक को फांसी की सजा दी जानी चाहिए थी।
दुराचारियों को बेनकाब करना जरूरी: भुवन गिरि जी
देवीधार के बाबा भुवन गिरि जी महाराज कहते हैं कि ऐसे आध्यात्मिक लोग समाज के लिए भारी कलंक हैं। धर्म में घुसे ऐसे दुराचारी लोगों को बेनकाब करना जरूरी है।