यही एक मुख्य कारण है कि प्रदेश में मातृ मृत्यु दर बढ़ रही है। ऐसे में इन्हें तेजी से प्रशिक्षित करने के लिए निजी अस्पतालों से समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे अस्पतालों में अनिवार्य रूप से समीक्षा की जाए जहां प्रतिवर्ष 500 महिलाओं का प्रसव होता है।
समिति की नोडल अधिकारी डॉ. सरोज नैथानी ने बताया कि प्रसव के पूर्व एएनएम द्वारा तीन बार जांच तो की जा रही है, लेकिन इसमें प्रसूति रोग विशेषज्ञ का परामर्श नहीं लिया जा रहा है। यह कारण भी मातृ मृत्यु का कारण बन रही है।
ऐसे में जरूरी है कि वह हर जांच के लिए महिला चिकित्सा अधिकारी का परामर्श लें। मिशन डायरेक्टर ने सभी जनपदों को एक सप्ताह के भीतर इस समीक्षा में दिए गए निर्देशों का पालन करने के आदेश दिए हैं। साथ ही सीएमओ को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रत्येक 15 दिन पर ब्लॉकस्तर के अस्पतालों में यह समीक्षा कराएं।
-घर में प्रसव के मामले में एएनएम प्रसूता के घर का निरंतर दौरा करें।
-प्रसव के बाद दूसरे या तीसरे दिन दौरा किया जाएगा और पांचवें दिन भी प्रसूता का हाल पूछा जाएगा।
-प्रसूता की कम से कम दो बार की जांच में महिला चिकित्सा अधिकारी का परामर्श लेना अनिवार्य होगा।
-गर्भवती की चार बार हीमोग्लोबीन जांच की जाएगी।
-मातृ मृत्यु की स्थिति में 24 घंटे के भीतर राज्य को इसकी जानकारी दी जाए।
-प्रत्येक समीक्षा बैठक में 108 के कर्मचारियों को भी बुलाया जाए ताकि महिलाओं को लाने ले जाने की स्थिति को वह समझ सके।