हरिद्वार में आसाराम पर अवैध निर्माण को लेकर शिकंजा कसता जा रहा है। आसाराम का आश्रम और फ्लैट न सिर्फ बिना नक्शा पास कराए बनाया गया बल्कि नियमों के खिलाफ उसमें जरूरत से ज्यादा फ्लैट बना दिए गए।
इस गैरकानूनी काम को कंपाउंड भी नहीं कराया जा सकता। अवैध रूप से आश्रम का निर्माण कराने के लिए हरिद्वार विकास प्राधिकरण (हविप्रा) ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जिसका जवाब 18 सितंबर तक दिया जाना है। इसे आसाराम का रसूख ही कहा जाएगा, कि हविप्रा ने कई साल चले अवैध निर्माण पर पहले कभी संज्ञान नहीं लिया।
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अब जब उनके सितारे गर्दिश में हैं तो उसने भी कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। हरिपुर कलां स्थित आश्रम का कवर्ड एरिया लगभग 10 हजार मीटर है। हरिपुर कलां में ही 1400 वर्ग मीटर में कई मंजिला फ्लैट हैं।
हविप्रा इन्हें अवैध मानता है, जो कंपाउंड की परिधि में भी नहीं हैं। अधिकारियों के अनुसार इन फ्लैट का नक्शा पास नहीं कराया गया। हविप्रा में फ्लैटों के अवैध निर्माण को लेकर निर्माण के वर्ष 2006 से ही नोटिस की कार्यवाही चल रही है।
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यह अवैध निर्माण हविप्रा की कार्यशैली पर भी प्रश्न चिन्ह लगाता है। नोटिस के बाद भी पांच मंजिल का निर्माण वर्ष 2006 में जब पहली मंजिल का कार्य चल रहा था तभी निर्माण रोकने का नोटिस आसाराम के प्रबंधक अशोक गर्ग को दे दिया गया था। इसके बाद भी पांच मंजिल तक 128 फ्लैटों का निर्माण हो गया।
अब हविप्रा के सामने इतने बड़े अवैध निर्माण को ध्वस्त करने की चुनौती है क्योंकि हविप्रा का बायलॉज इन फ्लैटों को कंपाउंड करने की इजाजत भी नहीं देता है। बायलॉज के अनुसार 2000 वर्ग मीटर एरिया में 30 फ्लैट बनाए जा सकते हैं, जबकि आसाराम ने 1400 वर्ग मीटर में 128 फ्लैट छाप दिए हैं।
नहीं हो पाई पैमाइश
सोमवार को भी आसराम के हरिपुर कलां स्थित आश्रम भूमि की पैमाइश नहीं हो पाई है। शुक्रवार को ऋषिकेश के पटवारी को भूमि की फर्दें नहीं मिल पाई थीं, जबकि सोमवार को हविप्रा का अवर अभियंता मीटिंग में व्यस्त होने के कारण पैमाइश करने नहीं पहुंचा।
हरिपुर कलां क्षेत्र में पटवारी वीके गुप्ता ने बताया कि मौके पर पैमाइश करने के बाद खसरा खतौनी निकाली जाएगी। इसके बाद ही पता चल पाएगा कितना रकबा बढ़ रहा है।
आसाराम के आश्रम की भूमि का पटवारी के साथ सर्वे करने का निर्देश दिया गया था। अभी रिपोर्ट मिली नहीं है, सर्वे रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।
- डा. रंजीत कुमार सिन्हा, वीसी हविप्रा
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