मौसम के शीत ऋतु में प्रवेश करते ही लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी मुश्किलें आ रही हैं। दून अस्पताल के ईएनटी विभाग की ओपीडी में हर रोज करीब 150 मरीज पहुंच रहे हैं। इनमें से 40 से भी अधिक मरीज ऐसे हैं जो पर्यावरणीय प्रभाव के कारण उत्पन्न हुई परेशानियों से जूझ रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक मरीजों का नाक, कान और गला अवरुद्ध हो रहा है। इससे उन्हें सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही है।
दून अस्पताल के ईएनटी विभाग की ओपीडी में मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। इसके पीछे की वजह बढ़ती ठंड को माना जा रहा है। इसमें सबसे अधिक परेशानी बच्चों और बुजुर्गाें के साथ ही ऐसे लोगों को हो रही है जो पहले से किसी दूसरी बीमारी से जूझ रहे हैं। दून अस्पताल के ईएनटी विभाग के चिकित्सक डॉ. नितिन बताते हैं कि ठंड के मौसम में मरीजों को तीन अलग-अलग स्तर पर परेशानी महसूस हो रही है। इसके शुरुआती चरण में मरीज के कान में भारीपन और दर्द की शिकायत देखने को मिलती है। दूसरे और तीसरे चरण में मरीज को कान से पस निकलने और पर्दे में छेद होने जैसी समस्या से जूझना पड़ सकता है। डॉ. नितिन के मुताबिक खांसी, जुखाम और गले में दर्द होने पर लोग एंटीबायोटिक दवाएं खाते हैं। जो काफी नुकसानदायक हैं।
Iबचाव के उपायI
सुबह और शाम के समय घर से बाहर न निकलें। नाक और कान को ढक कर रखें। गर्म पानी पीते रहें। पौष्टिक आहार का सेवन करें।