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अरविंद ने ऐसे तय किया वर्ल्ड रिकॉर्ड का सफर

Sat, 08 Mar 2014 04:12 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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पोलैंड के इरॉल मुझावाजी का लगातार 121 घंटे पढ़ाने का रिकॉर्ड ध्वस्त कर ग्राफिक एरा विवि के शिक्षक अरविंद मिश्रा ने 139 घंटे 42 मिनट का नया कीर्तिमान कायम किया है।
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बृहस्पतिवार/शुक्रवार रात 1:42 बजे अरविंद ने मैराथन लेक्चर को विराम दिया। अरविंद के सहयोगी शिक्षक तुषार गुप्ता ने बताया कि रात एक बजे तक अरविंद बेहद थक चुके थे।

परिजनों से बात करने के बाद किसी अनहोनी से बचने को लेक्चर खत्म करने का फैसला किया। इस दौरान विवि अध्यक्ष प्रो. कमल घनशाला भी मौजूद थे।

लेक्चर खत्म होते ही अरविंद सीएमआई अस्पताल ले जाए गए। यहां डॉक्टरों ने उन्हें स्वस्थ करार दिया, फिर अरविंद सोने चले गए।
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लाख रुपए कैश और डबल इंक्रीमेंट

विवि के मैकेनिकल विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर अरविंद मिश्रा की इस कामयाबी पर विवि अध्यक्ष ने एक लाख रुपये नकद पुरस्कार से नवाजा।

शुक्रवार सुबह गाजे बाजे और आतिशबाजी के बीच अरविंद को विवि लाया गया। सम्मान समारोह में चांसलर प्रो. आरसी जोशी ने अरविंद को डबल इंक्रीमेंट लेटर दिया।

कार्यक्रम में ग्राफिक एरा विवि के कुलपति प्रो. वीके तिवारी, ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. संजय जसोला आदि मौजूद रहे।

मीठे से किया परहेज, नमकीन खाया

लेक्चर की लॉग बुक और वीडियो रिकॉर्डिंग गिनीज बुक ऑफ रिकार्ड्स को भेजी जाएंगी। वेरिफिकेशन के बाद वहां से प्रमाण पत्र जारी होता है।

अरविंद मिश्रा के लिए बिना सोए इस तरह लेक्चर देना एक चुनौती से कम न था। उनकी डाइट का खास ख्याल रखा गया। एक मार्च को जब लेक्चर शुरू किया तो उन्हें डाइट में कुछ मीठा दिया गया, जिससे उन्हें नींद महसूस हुई।

अगले दिन से उनकी डाइट केवल नमकीन हो गई। उन्हें नमकीन दलिया, नमकीन ऑट्स के अलावा ताकत बढ़ाने को केवल बनाना शेक और एप्पल शेक ही दिया गया। लेक्चर के दौरान हर एक घंटे पर अरविंद को पांच मिनट का ब्रेक मिलता था।

वह कई घंटे तक ब्रेक न लेकर एक साथ ब्रेक ले लिया करते थे। कई बार लघुशंका के लिए उन्होंने दो-दो मिनट के ब्रेक भी लिए। ब्रेक के दौरान भी दोनों कैमरे ऑन रिकार्डिंग रहते थे। उनका यह लेक्चर वेबसाइट पर लाइव भी प्रसारित किया गया।
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अमेरिकी संस्थान से लिया कंटेंट

अरविंद ने अमेरिका के कैंब्रिज स्थित शोध संस्थान मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान (एमआईटी) से लेक्चर का कंटेंट हासिल किया।

बताते हैं, मैराथन लेक्चर के लिए इतने घंटे का कंटेंट जरूरी था। इसके लिए अमेरिका के एमआईटी संस्थान से संपर्क किया। प्रोफेसर गिलबर्ट स्ट्रेंज से कंटेंट का कॉपीराइट लिया।

इसे पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन में तब्दील करने में पूरा साल लगा। कड़ी मेहनत के बाद 80 घंटे का प्रेजेंटेशन बना।
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