वर्ष 2000 में जब उत्तराखंड राज्य की स्थापना हुई तो नैनीताल में राजधानी बनाया जाना लगभग तय था, लेकिन यहां के कुछ लोगों विशेषकर होटल एसोसिएशन के विरोध के बाद राजधानी देहरादून में बनाया जाना तय किया गया। इसके बाद हाईकोर्ट की स्थापना को लेकर लोग इसके पक्ष और विरोध में थे।
तब इस संबंध में निर्णय लेने के लिए बतौर केंद्रीय कानून मंत्री जेटली स्वयं नैनीताल आए थे। यहां नैनीताल क्लब में उन्होंने शहर के गणमान्य लोगों, आम जनों एवं वकीलों से चर्चा की थी, इसके बाद यहीं उन्होंने यह घोषणा की थी कि हाईकोर्ट नैनीताल में ही बनेगा। 9 नवंबर 2000 को जब राज्य स्थापना के साथ नैनीताल में हाईकोर्ट का उद्घाटन हुआ, तब उस दिन भी जेटली कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
9 सितंबर 2016 को जेटली परिवार के साथ चार दिन के दौरे पर नैनीताल आए थे। तब वे नौकुचियाताल, घोड़ाखाल, मुक्तेश्वर और जागेश्वर भी गए थे। राजभवन में तत्कालीन राज्यपाल केके पॉल ने शॉल ओढ़ाकर उनका स्वागत किया।
इस दौरान राज्यपाल के सचिव अरुण ढौडियाल, प्रभारी मंडलायुक्त डीएम दीपक रावत और कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक धीराज गर्ब्याल आदि अधिकारी मौजूद थे। तब वह वित्त मंत्री एवं भाजपा के पार्लियामेंट्री बोर्ड के सदस्य थे। उन्होंने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नैनीताल सांसद भगत सिंह कोश्यारी से राज्य में अगले वर्ष होने वाले चुनावों को लेकर लंबी बातचीत की थी।
जेटली ने चुनाव से छह माह पूर्व नैनीताल में ही यह स्पष्ट कर दिया था कि चुनाव से पूर्व भाजपा मुख्यमंत्री की घोषणा नहीं करेगी और सीएम का चयन चुनाव के बाद ही किया जाएगा।
वर्ष 2016 में जेटली के नैनीताल आगमन के दौरान यहां नंदादेवी का मेला चल रहा था। तब भाजपा नेता भगत सिंह कोश्यारी के साथ स्थानीय भाजपा नेताओं ने राजभवन में उनसे मुलाकात की थी। इन लोगों ने जेटली से नैना देवी मेले में आने का आग्रह किया, जिसे स्वीकारते हुए जेटली शाम के समय मेले में आए और उन्होंने मां नैना देवी के दर्शन भी किए थे।