केदार घाटी की आपदा के बाद मानसूनी बारिश दहशत लेकर आती है। दैवीय आपदा से निपटने के लिए शासन एवं प्रशासन की तैयारियों के बीच एसडीआरएफ की टीमें भी अलर्ट हो गई हैं। प्रदेश में एसडीआरएफ की 12 टीमों के 447 जांबाजों ने अत्याधुनिक संसाधनों के साथ ऑपरेशन रेस्क्यू के लिए मोर्चा संभाल लिया है।
दैवीय आपदा की दृष्टि से कुमाऊं की तुलना में गढ़वाल क्षेत्र अतिसंवेदनशील है। जून 2013 की केदार घाटी त्रासदी के बाद आपदा के दौरान तत्काल राहत एवं बचाव के लिए 9 अक्टूबर 2013 को राज्य आपदा प्रतिवादन बल (एसडीआरएफ) का गठन हुआ। एसडीआरएफ ने इन सालों में कई रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए और हजारों लोगों की जान बचाई है।
मानसून की बारिश शुरू होने से पहले ही उत्तराखंड में भूस्खलन और बाढ़ के लिहाज से संवेदनशील और अतिसंवेदनशील इलाकों में एसडीआरएफ के 447 जांबाज मुस्तैद हो गए हैं। एसडीआरएफ की 12 टीमें और 48 सब टीमें हैं। अधिकतर टीमें गढ़वाल मंडल में तैनात हैं। चार धाम यात्रा रूटों पर सर्वाधिक चौकसी बरती जा रही है।
एसडीआरएफ की टीमों की तैनाती
जिला तैनाती स्थल
चमोली बद्रीनाथ, गोचर, भ्यूडार, पांडुकेश्वर, घाघरिया
टिहरी ढालवाला, घनसाली, ऋषिकेश (तैराक)
उत्तरकाशी मनेरी, उजैली,भटवाड़ी, गंगोत्री, भोजवासा
नैनीताल नैनी झील (तैराक)
पिथौरागढ़ धारचूला
रुद्रपुर पीएसी मुख्यालय
अल्मोड़ा सरियापानी
बागेश्वर कपकोट
देहरादून चकराता, जॉलीग्रांट, सहस्त्रधारा (माउंटेनियरिंग टीम)
हरिद्वार पुलिस लाइन
रुद्रप्रयाग केदानाथ, सोन प्रयाग, गौरीकुंड, भीमबली
एसडीआरएफ की टीमों ने अब तक 229 रेस्क्यू ऑपरेशन चलाए हैं। रेस्क्यू से 3232 व्यक्तियों का सुरक्षित और 294 मृत व्यक्तियों के शवों को बरामद किया गया।
-राम सिंह मीणा, अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था
एसडीआरएफ विषम परिस्थिति में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में सक्षम है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में फंसे लोगों को सकुशल निकालने के लिए भी माउंटेनियरिंग टीम है। 17 सदस्यीय टीम अत्याधुनिक संसाधनों से लैस और प्रशिक्षण प्राप्त है।
- संजय गुंज्याल, आईजी, एफटीआरएफ