रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण
देहरादून, रुड़की, लैंसडोन, हर्षिल, रुद्रप्रयाग, जोशीमठ, रानीखेत, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ व धारचूला के मिलिट्री हॉस्पिटल के अलावा फ ील्ड हॉस्पिटल, सेक्शन हॉस्पिटल और जनरल हॉस्पिटल में। इसके अलावा जिला स्तर के ईसीएचएस क्लिनिक में भी ओपीडी सुविधा मिलेगी।
अर्द्धसैनिक बलों के डॉक्टरों से भी उम्मीद
अर्द्ध सैनिक बलों के चिकित्सकों से भी जन सामान्य के इलाज की उम्मीद है। इसके लिए जल्द ही राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात करेंगे।
उत्तराखंड में आईटीबीपी के अलावा एसएसबी और सीआरपीएफ की भी बटालियन हैं। आईटीबीपी तो सीमावर्ती इलाकों में होने से प्रदेश के लिए वरदान साबित होगा।
उत्तराखंड में चिकित्सकों की भारी कमी है। आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश में 2775 चिकित्सकों की जरूरत है। इसके मुकाबले केवल 1081 चिकित्सक ही उपलब्ध हैं। अभी 1634 डॉक्टर और चाहिए।
हाल ही में सरकार ने 478 चिकित्सकों की भर्ती की थी, जिसमें से आधे डॉक्टरों ने ही ज्वाइन किया है। इसी प्रकार, प्रदेश में 133 दंत चिकित्सकों में से 64 उपलब्ध हैं और 69 की जरूरत है। प्रदेश में वर्तमान में 285 स्पेशलिस्ट डॉक्टर ही उपलब्ध हैं।
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने सामान्य नागरिकों को सेना के चिकित्सकों द्वारा प्राथमिक उपचार पर सैद्धांतिक सहमति दी है। इसके कार्यान्वयन के लिए सेना के संबंधित कमान से चर्चा करेंगी। जल्द ही यह व्यवस्था जमीनी हकीकत के तौर पर सामने आएगी। निश्चित तौर पर प्रदेश की जनता के लिए यह सुविधा वरदान साबित होगी।
-अनिल बलूनी, राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी, भाजपा एवं राज्यसभा सांसद