कैसे हुई बिना प्रक्रिया के नियुक्तियां
कई बार पद रिक्त होने पर शिक्षक और अभिभावक संघ (पीटीए) भी व्यवस्था के तौर पर कुछ शिक्षकों की तैनाती करते हैं। शुरूआत में इन शिक्षकों को प्रबंधन अपने संसाधनों या छात्रों से जुटाकर मानदेय देता है। इन शिक्षकों की नियुक्ति के लिए न तो कोई विज्ञापन (विज्ञप्ति) जारी किया जाता है और न प्रक्रिया होती है। प्रबंधन अपने चहेते शिक्षक को रिक्त पद पर व्यवस्था के तौर पर समायोजित कर लेता है। धीरे-धीरे इन शिक्षकों को राजकीय मानदेय (दस हजार रुपये) पर समायोजित कर लिया जाता है। इसके बाद इन्हें तदर्थ नियुक्ति दे दी जाती है। कुछ समय बाद इन शिक्षकों को स्थाई कर दिया जाता है। इस तरह बिना नियुक्ति प्रक्रिया के शिक्षक को बैकडोर से पक्की नौकरी मिल जाती है।
अन्य नियुक्तियों में भी गड़बड़ी
अशासकीय विद्यालयों में शिक्षकों व स्टाफ की नियुक्ति में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी होती है। पिछले साल गड़बड़ी की कई शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय ने नियुक्ति प्रक्रिया रद करने के साथ ही उस वर्ष हुई सभी नियुक्तियों को निरस्त कर दिया था। ज्यादातर विद्यालयों में प्रबंधन ने पात्र शिक्षकों को दरकिनार कर चहेतों को नियुक्ति दी थी।
विज्ञापन दिया न इंटरव्यू लिया
अशासकीय विद्यालयों की प्रबंध समिति ने इन शिक्षकों की भर्ती के लिए कोई विज्ञापन जारी नहीं किया। नियमानुसार विज्ञापन जारी होने के बाद पात्र अभ्यर्थियों की मेरिट तैयार की जाती है। इनमें से सर्वश्रेष्ठ सात अभ्यर्थियों का साक्षात्कार लिया जाता है। साक्षात्कार में प्रबंधन समिति के साथ ही शिक्षा विभाग के अधिकारी भी शामिल रहते हैं। इसके बाद शिक्षकों को नियुक्ति दी जाती है। इन शिक्षकों की भर्ती के लिए कोई इंटरव्यू भी नहीं हुआ।
वर्षों से चल रहा खेल
पीटीए की ओर से तैनात किए गए व्यवस्था वाले शिक्षकों को राजकीय मानदेय के दायरे में लाने का यह पहला मामला नहीं है। वर्षों से शिक्षकों को इस तरह नौकरी देने का खेल चल रहा है। इसमें मंत्री-अधिकारी से लेकर कई विधायकों और विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता का भी आरोप है।
शिक्षक का पद रिक्त होने पर पीटीए शिक्षक की नियुक्ति की व्यवस्था एक्ट में दी गई है। राजकीय मानदेय के दायरे में सभी शिक्षकों को नहीं लिया जा सकता। एक्ट के अनुसार केवल वही शिक्षक मानदेय के दायरे में आ सकते हैं, जो सभी अर्हताएं पूरी करते हों। साथ ही जिनकी नियुक्ति प्रक्रिया नियमानुसार हो।
-आरके कुंवर, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा।
अब तक पीटीए शिक्षकों को कुछ समय बाद राजकीय मानदेय में लाया जाता रहा है। अब राजकीय मानदेय से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा। जिलों में जो प्रस्ताव आए हैं, उनकी पूरी जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कैप्टन आलोक शेखर तिवारी, महानिदेशक, विद्यालयी शिक्षा