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आर्मी चीफ बनने के बाद पहली बार अपने घर पहुंचे विपिन रावत, दी ये सौगात

Sun, 25 Mar 2018 07:43 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, श्रीनगर
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bipin rawat
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थल सेनाध्यक्ष बनने के बाद पहली बार गृह जनपद पौड़ी के श्रीनगर पहुंचे बिपिन रावत को देखने के लिए जनता पहुंची। आने के बाद उन्होंने क्षेत्र के लोगों को एक सौगात भी दे दी।

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राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर को सेना के साथ मिलकर चलाया जा सकता है। कॉलेज के संचालन में सेना प्रदेश सरकार का सहयोग करेगी। रविवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज और बेस अस्पताल श्रीनगर का निरीक्षण करने प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत और थल सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत ने यही संकेत दिया है।

रविवार शाम को थल सेनाध्यक्ष देहरादून से श्रीनगर पहुंचे। हेलीपैड से सबसे पहले वह बेस अस्पताल पहुंचे। यहां उन्होंने अधिकारियों के साथ विभिन्न वार्डों का निरीक्षण किया। इसके बाद वह मेडिकल कॉलेज पहुंचे। जहां पहले से प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत मौजूद थे।
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यहां दोनों ने लेक्चर हॉल अधिकारियों और संकाय सदस्यों के साथ मुलाकात की। संक्षिप्त कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि अस्पताल ठीक ठाक है। यदि इसमें कुछ और सुधार किए जाए, तो यह बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने आश्वस्त किया कि कॉलेज को चलाने में सेना सहयोग करेगी। दिल्ली में इस पर चर्चा की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सेना ने कॉलेज को लेने को सहमति दे दी है। जबकि अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज को लेने में एम्स ने रुचि दिखाई है। कुछ क्षणों तक चली मीटिंग के बाद आर्मी चीफ सीधे रवाना हो गए।

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bipin rawat
बैठक के बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 10 माह पूर्व आर्मी चीफ और प्रधानमंत्री के रक्षा सलाहकार के साथ मुलाकात हुई थी। जिसमें यह चर्चा हुई थी कि किस प्रकार उत्तराखंड में बेहतर सुविधाएं दी जाए।

उत्तराखंड सैनिक बाहुल्य क्षेत्र है। आर्मी मेडिकल कॉलेज पुणे की तर्ज पर यदि मेडिकल कॉलेज श्रीनगर को चलाए जाए, तो सभी को लाभ मिलेगा। क्योंकि सेना के पास ऐसा संस्थान होना चाहिए, जहां हाई एल्टीट्यूड की बीमारियों का इलाज हो सके।

उन्होंने कहा कि आज उन्हे खुशी है कि रक्षा मंत्री ने देहरादून में आज सहमति भी दे दी। सेना को कॉलेज कब सौंपा जाएगा, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी थोड़ा समय लगेगा। कॉलेज में कार्यरत संविदा फैकल्टी और अस्थायी कर्मचारियों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि किसी का भी बुरा नहीं होगा। इस मौके पर राज्य मंत्री डा. धन ङ्क्षसह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह आदि मौजूद थे।

अस्थायी कर्मचारी परेशान
सेना अधिकारियों और मुख्यमंत्री के जाने के बाद अस्थायी कर्मचारियों ने प्राचार्य से मुलाकात की। कर्मचारियों का कहना था कि वह सालों से संस्थान में सेवाएं दे रहे हैं। कॉलेज को सेना के हवाले किया जा रहा है। लेकिन उनका क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा है। उन्होंने रोष जताया कि यदि उनका आज तक नियमितीकरण हो जाता, तो उनको ऐसा परेशान न होना पड़ता।
 
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