बैठक के बाद पत्रकारों से वार्ता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 10 माह पूर्व आर्मी चीफ और प्रधानमंत्री के रक्षा सलाहकार के साथ मुलाकात हुई थी। जिसमें यह चर्चा हुई थी कि किस प्रकार उत्तराखंड में बेहतर सुविधाएं दी जाए।
उत्तराखंड सैनिक बाहुल्य क्षेत्र है। आर्मी मेडिकल कॉलेज पुणे की तर्ज पर यदि मेडिकल कॉलेज श्रीनगर को चलाए जाए, तो सभी को लाभ मिलेगा। क्योंकि सेना के पास ऐसा संस्थान होना चाहिए, जहां हाई एल्टीट्यूड की बीमारियों का इलाज हो सके।
उन्होंने कहा कि आज उन्हे खुशी है कि रक्षा मंत्री ने देहरादून में आज सहमति भी दे दी। सेना को कॉलेज कब सौंपा जाएगा, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी थोड़ा समय लगेगा। कॉलेज में कार्यरत संविदा फैकल्टी और अस्थायी कर्मचारियों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि किसी का भी बुरा नहीं होगा। इस मौके पर राज्य मंत्री डा. धन ङ्क्षसह रावत, मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह आदि मौजूद थे।
अस्थायी कर्मचारी परेशान
सेना अधिकारियों और मुख्यमंत्री के जाने के बाद अस्थायी कर्मचारियों ने प्राचार्य से मुलाकात की। कर्मचारियों का कहना था कि वह सालों से संस्थान में सेवाएं दे रहे हैं। कॉलेज को सेना के हवाले किया जा रहा है। लेकिन उनका क्या होगा, यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा है। उन्होंने रोष जताया कि यदि उनका आज तक नियमितीकरण हो जाता, तो उनको ऐसा परेशान न होना पड़ता।