यदि सैन्य अफसरों की मंदारिन भाषा पर मजबूत पकड़ होगी तो वे चीनी सैनिकों की बातों को सही से समझने के साथ ही वाजिब जवाब भी दे पाएंगे। वहीं भारतीय सैन्य अकादमी के समादेशक ले. जनरल हरिंदर सिंह का कहना है कि इन बदलाव के बाद सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कैडेट और अधिक दक्ष होंगे।
युद्ध के नए तरीकों से भी कैडेटों को किया जा रहा है पारंगत
वर्तमान में युद्ध की तकनीक पूरी तरह से बदल चुकी है। दुश्मन देश इसके लिए नई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे है। लिहाजा अब भारतीय सेना भी अपने अफसरों को नई तकनीकों में पारंगत बनाना शुरू कर दिया है।
इसके लिए आर्मी कैडेट कॉलेेज में इनोवेशन लैब स्थापित किया गया है। जिसमें आईआईटी गुवाहटी का सहयोग लिया जा रहा है। आईआईटी की फैकल्टी वक्त-वक्त पर एसीसी में आकर कैडेटों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स समेत उच्च तकनीक में पारंगत बनाने का काम कर रही है।