उत्तराखंड में नई टिहरी के आबादी क्षेत्रों में जंगली जानवरों की धमक बढ़ने से लोग परेशान हैं। यही वजह है कि लोगों ने अब खेती रक्षा के लिए बंदूक और पिस्टल रखना शुरू कर दिया है।
वर्ष 2013-14 में 389 लोगों ने शस्त्र लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। इनमें से 62 आवेदनों को लाइसेंस जारी किए गए हैं। जिला कार्यालय में लाइसेंस लेने के लिए 120 आवेदन अभी भी लाइन में लगे हैं।
जिले में 5129 शस्त्र धारक हैं, जिनमें 1982 एक नाल कारतूस, 485 दो नाल कारतूस, 281 पिस्टल, 121 राइफल, 1927 एक नाल भरवा बंदूक, 333 दो नाल भरवा बंदूक शामिल हैं।
आत्म सुरक्षा के लिए लाइसेंस मांगा
नरेंद्रनगर में 823, टिहरी 734, घनसाली 573, जौनपुर 521, कीर्तिनगर 589, देवप्रयाग 676, चंबा 510, जाखणीधार 372, थौलधार 331 लोगों के पास लाइसेंस शस्त्र हैं। वर्ष 2012 से मई 2014 तक 101 छोटे-बड़े शस्त्रों के लाइसेंस जारी हुए हैं।
जबकि 514 लोगों ने शस्त्रों के लिए आवेदन किया था। लेकिन औपचारिकताएं पूर्ण नहीं होने से आवेदन निरस्त हुए हैं। इन आवेदकों में 319 ने खेती सुरक्षा, 115 ने विभिन्न सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं में सुरक्षा गार्ड की नौकरी और 80 लोगों ने आत्म सुरक्षा के लिए लाइसेंस मांगा है।
वर्ष 2011 से पहले जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस जारी होते थे। जिस पर सरकार ने रोक लगाकर खेती सुरक्षा के नाम पर लाइसेंस जारी करने के आदेश दिए थे। जानमाल की सुरक्षा संबंधी प्रकरण की गहनता से जांच के उपरांत संस्तुति की जाती है। पूर्व सैनिकों, अर्ध सैनिक बलों को ही सुरक्षा गार्ड की नौकरी के लिए लाइसेंस की अनुमति प्रदान की जाती है। -मुख्तार मोहसिन, पुलिस अधीक्षक टिहरी।